Trending News

 संसद के बजट सत्र का हुआ शुभारंभ, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को किया संबोधित, कहा- भारत के तेज विकास और विरासत के उत्सव के रूप में स्वर्णिम रहा बीता वर्ष         महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन, बारामती में लैंडिंग के समय प्लेन क्रैश में गई जान, प्लेन में सवार अजित पवार सहित सभी 6 लोगों की मौत         भारत और EU के बीच साइन हुआ दुनिया का सबसे बड़ा FTA, दुनिया की 20% GDP, 17% वैश्विक व्यापार और 25% से अधिक आबादी को कवर करेगी ये ट्रेड डील, दुनिया ने इस समझौते को बताया Mother Of All Deals         वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा, 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कारों की घोषणा, 19 महिलाएं और 16 लोगों को मरणोपरांत पद्म सम्मान       

गुजरात का सहकारी मॉडल: महिला सशक्तिकरण की नई कहानी

महिला संचालित दुग्ध सहकारी समितियां जिनका पांच साल पहले दैनिक राजस्व करीब 17 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 25 करोड़ रुपये प्रतिदिन हो गया है, यानी सालाना कमाई 6,310 करोड़ से बढ़कर 9,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है

Published: 16:36pm, 08 Jul 2025

गुजरात में महिलाओं ने अब सिर्फ घर की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि दूध उत्पादन और सहकारी समितियों में भी बड़ी भूमिका निभानी शुरू कर दी है। राज्य में महिला संचालित दुग्ध समितियां न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बना रही हैं।

इन समितियों की आर्थिक स्थिति में भी जबरदस्त सुधार हुआ है। पांच साल पहले इनका दैनिक राजस्व करीब 17 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 25 करोड़ रुपये प्रतिदिन हो गया है। यानी सालाना कमाई 6,310 करोड़ से बढ़कर 9,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। यह 43% की वृद्धि है, जो इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनती जा रही हैं।

साल 2020 में जहां महिला संचालित दुग्ध समितियां रोज़ाना 41 लाख लीटर दूध इकट्ठा करती थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 57 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है। यह 39% की बड़ी बढ़ोतरी है। अब ये समितियां गुजरात के कुल दूध संग्रहण का लगभग 26% हिस्सा बन चुकी हैं।

गुजरात में लगभग 36 लाख दुग्ध उत्पादक सदस्य हैं, जिनमें 12 लाख महिलाएं शामिल हैं। यानी हर तीसरे सदस्य के रूप में महिलाएं जुड़ चुकी हैं। यही नहीं, सहकारी समितियों की प्रबंधन समितियों में भी महिलाओं की भागीदारी 14% बढ़ी है। 2020 में जहां ऐसी समितियों में 70,200 महिलाएं थीं, अब यह संख्या 80,000 हो चुकी है।

दुग्ध संघों के बोर्ड में भी महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। 2025 में 82 निदेशकों में से 25% महिलाएं हैं, जो नीति निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका को दिखाता है।

गुजरात का यह सहकारी मॉडल अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुका है। यह न सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि गांवों में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नई कहानी भी लिख रहा है।

YuvaSahakar Desk

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x