गुजरात हाईकोर्ट ने अमूल उत्पादों का विपणन करने वाली गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के खिलाफ ₹43.43 करोड़ की GST मांग रद्द कर दी है। यह मामला जुलाई 2017 से मार्च 2019 के बीच हुए खर्चों से जुड़ा था। अमूल के आनंद स्थित मुख्य कार्यालय ने विज्ञापन, कानूनी सेवाओं, आईटी और दूसरे कॉरपोरेट कामों पर खर्च किया था।
GST विभाग का कहना था कि अमूल की अलग-अलग जगहों पर बनी शाखाओं के अलग GST रजिस्ट्रेशन हैं। इसलिए मुख्य कार्यालय से शाखाओं को दी गई सेवाओं पर भी GST लगना चाहिए। वहीं, अमूल ने अदालत में कहा कि इन सेवाओं के लिए शाखाओं से अलग से कोई पैसा नहीं लिया गया था। सभी खर्च कंपनी के खातों में सही तरीके से दर्ज थे।
हाईकोर्ट ने अमूल की दलील को स्वीकार किया। अदालत ने कहा कि जब मुख्य कार्यालय ने शाखाओं से इन सेवाओं के लिए कोई अलग रकम नहीं ली, तो GST नियमों के तहत ऐसी सेवाओं की कीमत शून्य (Nil) मानी जा सकती है। इसके साथ ही अदालत ने अमूल पर लगाई गई ₹43.43 करोड़ की GST मांग को रद्द कर दिया।
यह फैसला उन कंपनियों और संस्थाओं के लिए भी अहम है, जिनका एक मुख्य कार्यालय और अलग-अलग राज्यों में GST रजिस्ट्रेशन वाली शाखाएं हैं। फैसले से मुख्य कार्यालय और शाखाओं के बीच होने वाली आंतरिक सेवाओं पर GST लगाने के नियमों को लेकर अधिक स्पष्टता मिली है।


