मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के असर अब देश के कई शहरों में रसोई तक पहुंचने लगे हैं। घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई जगह गैस सिलेंडर ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं, जिससे लोगों के लिए रोजमर्रा का खाना बनाना मुश्किल होता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, कई शहरों में गैस एजेंसियों पर सिलेंडर की आपूर्ति कम होने के कारण लोग मजबूरी में ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीद रहे हैं।
ब्लैक मार्केट में बढ़े दाम
- दिल्ली-एनसीआर: घरेलू गैस सिलेंडर 3000 रुपये तक बेचा जा रहा है।
- मुंबई: 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर 2800 से 3000 रुपये तक पहुंच गया है।
- बेंगलुरु: कई इलाकों में सिलेंडर सामान्य कीमत से करीब 1.5 गुना महंगा बिक रहा है।
- कोलकाता: कुछ जगहों पर कमर्शियल सिलेंडर 3000 रुपये तक में बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
अमेजन और फ्लिपकार्ट पर इंडक्शन की मांग में बढ़ोतरी
अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी इंडक्शन चूल्हे के ऑर्डर में भारी वृद्धि देखी जा रही है। अमेजन इंडिया के प्रवक्ता के अनुसार, पिछले दो दिनों में इंडक्शन चूल्हे की बिक्री में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने आगे कहा, “इसी समय, राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की मांग सामान्य से लगभग चार गुना अधिक है, जबकि एयर फ्रायर और मल्टी-यूज केतली की बिक्री लगभग दोगुनी हो गई है।”
ग्रामीण इलाकों मे इंडक्शन नही कर रहा काम
सिलेंडर महंगे होने के कारण कई परिवारों ने इंडक्शन चूल्हे का सहारा लेने की कोशिश की, लेकिन यह विकल्प भी हर जगह कारगर साबित नहीं हो रहा है। कई इलाकों में कम वोल्टेज, बार-बार बिजली कटौती और अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण इंडक्शन चूल्हे ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में बिजली की स्थिति खराब होने के कारण लोग गैस के विकल्प के तौर पर इंडक्शन का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इससे रसोई चलाना और मुश्किल हो गया है।
रेस्टोरेंट और ढाबों पर भी असर
गैस सिलेंडर की कमी का असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और केटरिंग कारोबार पर भी पड़ रहा है। कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता कम होने के कारण कई कारोबारियों को ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है।
कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।


