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देश में 35,145 नई एम-पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित

इनमें 9,261 एम-पैक्स, 23,689 डेयरी सहकारी समितियां और 2,195 मत्स्य सहकारी समितियां शामिल हैं

Published: 11:41am, 12 Mar 2026

भारत सरकार ने देश की सभी पंचायतों और गांवों को सहकारी सेवाओं के दायरे में लाने के उद्देश्य से अगले पांच वर्षों में नई बहुउद्देशीय पैक्स (MPACS), डेयरी (MDCS) और मत्स्य (MFCS) सहकारी समितियां स्थापित करने की योजना को मंजूरी दी है। इस पहल को नाबार्ड, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), राष्ट्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड (NFDB) तथा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों का सहयोग प्राप्त है।

राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस के अनुसार 12 मार्च 2026 तक देशभर में कुल 35,145 नई सहकारी समितियां स्थापित की गई हैं। इनमें 9,261 एम-पैक्स, 23,689 डेयरी सहकारी समितियां और 2,195 मत्स्य सहकारी समितियां शामिल हैं।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ऐसी पंचायत या गांव, जहां अभी सहकारी संस्थाओं की पहुंच नहीं है, वहां एक कार्यशील सहकारी समिति स्थापित हो सके ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी आंदोलन का विस्तार किया जा सके।

नई बहुउद्देशीय पैक्स समितियों को आदर्श उपविधियों के तहत 25 से अधिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी गई है। इसके माध्यम से इन्हें केवल ऋण प्रदान करने वाली संस्थाओं से आगे बढ़ाकर बहु-सेवा संस्थानों में बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जो कृषि इनपुट, भंडारण, विपणन और अन्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करा सकें।

ये समितियां प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (PMKSK) के माध्यम से उर्वरक और बीज वितरण, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए डिजिटल सेवाएं, कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) का संचालन और दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना जैसे कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में भी सहयोग कर रही हैं।

सरकार के अनुसार गतिविधियों के विविधीकरण से पैक्स की आय के कई स्रोत विकसित होंगे, जिससे केवल ऋण संचालन पर निर्भरता कम होगी और उनकी वित्तीय स्थिरता मजबूत होगी। साथ ही यह पहल किसानों, महिलाओं और अन्य ग्रामीण हितधारकों की सहकारी संस्थाओं में भागीदारी बढ़ाकर सहकारी क्षेत्र में लोकतांत्रिक शासन को भी सुदृढ़ करेगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंप्यूटरीकरण से जुड़ाव के कारण इन समितियों की पारदर्शिता, कार्यकुशलता और सहकारी बैंकों तथा अन्य संस्थानों के साथ कनेक्टिविटी भी बेहतर हो रही है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से देश में सहकारी आंदोलन की पहुंच और संस्थागत क्षमता दोनों को मजबूती मिलेगी।

Diksha