सहकारिता मंत्रालय ने तमिलनाडु की अरक्कंदनल्लूर प्राथमिक कृषि ऋण समिति (PACS) का उदाहरण साझा करते हुए बताया है कि किस तरह डिजिटलीकरण ने प्राकृतिक आपदा के दौरान वर्षों के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में मदद की।
मंत्रालय के अनुसार बाढ़ के कारण समिति के कई भौतिक दस्तावेज नष्ट हो गए, लेकिन e-PACS Enterprise Resource Planning (ERP) प्रणाली में सुरक्षित डिजिटल डेटा पूरी तरह संरक्षित रहा। इससे समिति को जरूरी सूचनाओं तक पहुंच बनाए रखने और संकट के दौरान अपने कामकाज को जारी रखने में मदद मिली।
इस उदाहरण से यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल प्लेटफॉर्म सहकारी संस्थाओं के लिए केवल प्रशासनिक सुविधा ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड सुरक्षा और संचालन की निरंतरता का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। खासकर ग्रामीण और जमीनी स्तर पर काम करने वाली PACS जैसी संस्थाओं के लिए डिजिटल रिकॉर्ड प्राकृतिक आपदा, आग या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों में अहम सुरक्षा कवच साबित हो सकते हैं। सहकारिता मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता PACS के आधुनिकीकरण की दिशा में चल रहे व्यापक प्रयासों की उपयोगिता को दर्शाती है। केंद्र सरकार e-PACS ERP के माध्यम से सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है।
यह पहल “सहकार से समृद्धि” के विजन के तहत सहकारी क्षेत्र को तकनीकी रूप से सक्षम, अधिक लचीला और भविष्य की चुनौतियों के प्रति बेहतर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


