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37 लाख निजी स्कूल शिक्षकों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय नीति की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के निजी स्कूल शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद संरक्षण के लिए राष्ट्रीय नीति और वैधानिक ढांचा बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है

Plea Seeks Pension and Social Security Protection for 3.73 Million Private School Teachers


Published: 12:57pm, 11 Sep 2026

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के निजी स्कूल शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद संरक्षण के लिए राष्ट्रीय नीति और वैधानिक ढांचा बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद यानी NCTE सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

केरल की लिगिमोल जॉर्ज की ओर से अधिवक्ता दीपक प्रकाश के माध्यम से दायर याचिका में निजी स्कूल शिक्षकों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कल्याणकारी ढांचा तैयार करने की मांग की गई है। याचिका में राष्ट्रीय निजी स्कूल शिक्षक कल्याण बोर्ड या इसी प्रकार के किसी संस्थागत तंत्र के गठन पर भी विचार करने की बात कही गई है।

प्रस्तावित व्यवस्था में शिक्षकों के लिए पेंशन, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

याचिका में शिक्षा मंत्रालय के UDISE+ 2023-24 आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि देश में लगभग 14.72 लाख स्कूल, 98 लाख से अधिक शिक्षक और करीब 24.8 करोड़ विद्यार्थी हैं। इनमें मान्यता प्राप्त निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में करीब 37.30 लाख शिक्षक कार्यरत हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि निजी स्कूल शिक्षकों के लिए फिलहाल कोई समान राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा तंत्र नहीं है। अलग-अलग राज्यों और संस्थानों में नियम अलग होने के कारण शिक्षकों को पेंशन, चिकित्सा सहायता और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में असमानता का सामना करना पड़ता है।

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य निजी स्कूलों के प्रशासन में हस्तक्षेप करना नहीं बल्कि शिक्षकों के लिए समान और मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

Jitendra