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डिजिटल इंडिया में बच्चों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी

डिजिटल इंडिया के बढ़ते दायरे के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। साइबर ठगी, डेटा चोरी, फर्जी निवेश और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों ने इंटरनेट सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

डिजिटल इंडिया के बढ़ते दायरे के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है।


Published: 10:57am, 09 Jul 2026

डिजिटल इंडिया ने देश को तेज इंटरनेट, ऑनलाइन शिक्षा, मोबाइल ऐप और डिजिटल सेवाओं से जोड़ा है। आज बच्चे भी पढ़ाई, गेमिंग, सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट के लिए मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भर होते जा रहे हैं। लेकिन डिजिटल विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण की चुनौती भी तेजी से बढ़ी है। ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश और डेटा चोरी जैसे मामलों ने आम लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

जनवरी 2026 में एक महिला को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 2.39 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। इसी तरह टेलीग्राम और ऑनलाइन निवेश के नाम पर 75 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया। इन घटनाओं से साफ है कि साइबर अपराधी अब केवल ओटीपी या बैंक डिटेल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डर, लालच और फर्जी सरकारी जांच का सहारा लेकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

जब पढ़े-लिखे और जागरूक लोग भी साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं, तो बच्चों की सुरक्षा और भी गंभीर मुद्दा बन जाती है। बच्चे अक्सर बिना समझे ऐप डाउनलोड कर लेते हैं, गेमिंग प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी साझा करते हैं और अनजान लिंक खोल देते हैं। इससे उनका नाम, फोटो, लोकेशन, स्कूल और परिवार से जुड़ी जानकारी गलत हाथों में जा सकती है।

भारत में करीब 154 करोड़ मोबाइल कनेक्शन हैं। इतने बड़े डिजिटल यूजर बेस में बच्चों का डेटा भी कंपनियों और साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बन सकता है। कई मोबाइल ऐप्स अनावश्यक रूप से लोकेशन, कॉन्टैक्ट, कैमरा और माइक्रोफोन जैसी परमिशन मांगते हैं, जिससे निजी डेटा के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ डिजिटल सुविधा देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। स्कूल स्तर पर साइबर सुरक्षा की पढ़ाई अनिवार्य की जानी चाहिए। बच्चों के लिए बने ऐप्स, गेमिंग प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी होनी चाहिए। डेटा सुरक्षा कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू कर बच्चों की निजी जानकारी को सुरक्षित करना जरूरी है।

डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। ऐसे मामलों में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना चाहिए।

डिजिटल इंडिया तभी सफल होगा, जब बच्चे इंटरनेट का उपयोग सुरक्षित, जिम्मेदारीपूर्ण और भरोसे के साथ कर सकें। बच्चों का डिजिटल भविष्य बचाना सरकार, समाज, स्कूल और परिवार की साझा जिम्मेदारी है, लेकिन सबसे बड़ी जवाबदेही सरकार की है।

Jitendra