केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए भले ही यह कहा हो कि यह बजट आम आदमी, महिलाओं, किसानों और युवाओं पर फोकस है मगर इस बजट में आम आदमी को इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं मिली है, जिसका इंतजार आम लोगों को सबसे ज्यादा रहता है। वह 85 मिनट बोलीं, लेकिन आम आदमी के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं किया। वहीं फ्यूचर एंड ऑप्शन में ट्रेडिंग करने वाले शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में वृद्धि से भी निराशा हाथ लगी है।
वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि ऑप्शन प्रीमियम पर Securities Transaction Tax (STT) बढ़ाकर 0.15 फीसदी कर दिया गया है, जबकि फ्यूचर्स पर STT को बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है यानी इससे अब ट्रेड करना थोड़ा महंगा हो जाएगा। रिटेल निवेशकों को फ्यूचर्स एंड ऑप्शन से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। STT महंगा होने से लोग ऑप्शन में ट्रेड करने से बचेंगे। मगर बजट में इस घोषणा से सेंसेक्स 2300 अंक लुढ़क गया। बजट में वित्त मंत्री ने आईटीआर 1 और 2 को भरने की समय सीमा को 31 मई से बढ़ाकर 31 जुलाई करने, आईटीआर फॉर्म आसान करने और छोटे टैक्स पेयर्स के लिए नई स्कीम लाने का ऐलान बजट में जरूर किया है। साथ ही, आम लोगों के लिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं को सस्ता कर दिया गया है और हाई स्पीड रेल के 7 नए कॉरीडोर बनाने का ऐलान किया गया है।
इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं
इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। हालांकि रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के लिए 3 महीने का ज्यादा समय दिया यानी अब 31 दिसंबर के बदले 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। न्यू इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। फॉर्म रीडिजाइन किए गए हैं, ताकि आम लोग उसे आसानी से भर सकें।
मैन्युफक्चरिंग को बूस्टर डोज
देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए इस बजट में मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई सेक्टर के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, वह जरूर सकारात्मक पक्ष है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए सात क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग और मध्यम, छोटे एवं लघु उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए जो प्रस्ताव रखे हैं उससे न सिर्फ मेक इन इंडिया की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है, बल्कि निर्यात के मोर्चे पर भी इन क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ने की संभावना बनने वाली है। देश को सेमीकंडक्टर सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत का ऐलान किया गया है। इससे वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में भारत की स्थित मजबूत होगी। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए बजट को बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह स्कीम अप्रैल 2025 में 22,919 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई थी जिसे उद्योग जगत की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इसे देखते हुए ही इस स्कीम के लिए बजट में वृद्धि का फैसला किया गया है।
यह कदम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 की सफलताओं से भी प्रेरित है जिसने भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर की क्षमताओं को फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और डिजाइन में निवेश को बढ़ावा देकर मजबूत किया। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 के तहत सरकार की योजना असेंबली और टेस्टिंग से आगे बढ़कर उपकरण, मैटेरियल, डिजाइन और फुल-स्टैक भारतीय इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी तक एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार करने की है।
एमएसएमई को 10 हजार करोड़ का पैकेज
ट्रंप टैरिफ से मचे हड़कंप और यूरोपीय संघ से हुए ट्रेड डील के बीच वित्त मंत्री ने एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने पर भी इस बजट में पूरा जोर दिया है ताकि यूरोपीय बाजार का लाभ उठाया जा सके। एमएसएमई सेक्टर लंबे समय से संकट से जूझ रहा है और सरकार से मदद की गुहार लगा रहा था जिसे इस बार मोदी सरकार ने सुन लिया है। यह क्षेत्र इस बात की मांग करता रहा है कि विनिर्माण इकाइयों के लिए पूंजी की लागत कम की जाए, ताकि उत्पादन और प्रतिस्पर्धा दोनों को बढ़ावा मिल सके। यह क्षेत्र न सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग में सबसे ज्यादा योगदान देता है, बल्कि सबसे ज्यादा रोजगार भी इसी क्षेत्र में मिलता है। यह क्षेत्र देश की आर्थिक रीढ़ है। निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में इस क्षेत्र के लिए राहत का उपाय करते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि चैंपियन की तरह इन्हें बढ़ाएं। एमएसएमई सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का प्रावधान किया गया है जिससे छोटे और मझोले उद्यमों को सस्ती वित्तीय सहायता मिलेगी। इससे उत्पादकों को तो फायदा मिलेगा ही, निर्यातक भी लाभान्वित होंगे। एमएसएमई सेक्टर को मजबूती मिलने से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में वृद्धि होगी।
वित्त मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत 2,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन की घोषणा की है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को दोबारा सक्रिय करने और लघु उद्योगों को मजबूती देने के लिए 7,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, हथकरघा और पारंपरिक उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू करने की घोषणा की गई है।
बायोफार्मा हब बनाने की तैयारी
बजट में बायोफार्मा क्षेत्र पर भी विशेष जोर दिया गया ताकि भारत को विश्व का प्रमुख बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाया जा सके। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य लक्ष्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और इसके लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। इससे न केवल भारत के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत होगी। साथ ही उच्च मूल्य वाले उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें।
एसटीटी ने बढ़ाई कंपनियों की चिंता
उद्योग जगत टैक्स प्रणाली को सरल बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को कम करने और नकदी प्रवाह सुधारने की मांग कर रहा था। खास तौर पर जीएसटी रिफंड में तेजी, निर्यात से जुड़े क्लेम्स के शीघ्र निपटान और फंसी हुई वर्किंग कैपिटल को मुक्त करने पर जोर दे रहा था। इन अपेक्षाओं को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया गया है, लेकिन शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के लिए फ्यूचर एंड ऑप्शन में ट्रेडिंग करने वाले के लिए जिस तरह से सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाया गया और शेयर बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स लगा दिया गया है उससे कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। इसका असर शेयर बाजार पर साफ दिखा।
यह बजट तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित है, जिनमें विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा शामिल हैं। सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को रोजगार सृजन, नवाचार और निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार मानते हुए कदम उठाए हैं। मौजूदा समय में दुनियाभर के देशों में बढ़ते तनाव और टैरिफ वार को देखते हुए घरेलू उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता बन गया है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में 350 से अधिक सुधार लागू किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई और औद्योगिक विकास को गति देना है।
कैंसर की दवाओं से कस्टम ड्यूटी हटेगी
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। ये एडवांस कैंसर की इंपोर्ट होने वाली दवाएं हैं। अभी 5% कस्टम ड्यूटी लगती थी। हीमोफिलिया, सिकल सेल और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाइयां भी ड्यूटी फ्री कर दी गई हैं।
7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा
वित्त मंत्री ने बजट में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की। ये मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच बनेंगे। अगले 5 साल में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग बनेंगे। बनारस और पटना में जहाज मरम्मत की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।


