हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टौंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना अब आगे बढ़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। 17 साल से लंबित इस परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता हुआ है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा शर्मा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। योजना का सबसे बड़ा लाभ खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने के रूप में सामने आने की उम्मीद है। बांध बनाने के लिए हिमाचल के हिस्से के 2000 करोड़ रुपए दिल्ली और राजस्थान देंगे, क्योंकि हिमाचल के हिस्से का पानी इन दोनों राज्यों को जाएगा। इस प्रोजेक्ट में 232.6 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा। इसे बनाने में लगभग 15 हजार करोड़ रुपए लागत आएगी।
परियोजना पूरी होने के बाद करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है। इससे खासकर उन क्षेत्रों के किसानों को फायदा हो सकता है जहां खेती वर्षा या सीमित जल संसाधनों पर निर्भर है। बांध में वर्षा के मौसम के पानी को संग्रहित कर जरूरत के समय सिंचाई और अन्य उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे किसानों को फसल के महत्वपूर्ण चरणों में पानी मिलने और खेती की अनिश्चितता कम होने की संभावना है।
राजस्थान को परियोजना से करीब 124 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलने की व्यवस्था बताई गई है। इसका उपयोग शेखावाटी क्षेत्र सहित जल की कमी वाले इलाकों में किया जा सकता है जिससे कृषि और जल सुरक्षा को सहारा मिलने की उम्मीद है।
परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है। इसके जल घटक की लगभग 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी जबकि शेष हिस्सा भागीदार राज्यों के बीच साझा होगा।
किशाऊ परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य पानी का भंडारण बढ़ाना, किसानों को सिंचाई उपलब्ध कराना, शहरों और गांवों के लिए जल आपूर्ति मजबूत करना और यमुना बेसिन में बेहतर जल प्रबंधन सुनिश्चित करना है। लंबे समय से अटकी परियोजना आगे बढ़ती है तो उत्तर भारत के किसानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना साबित हो सकती है।


