कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में जून 2027 से द्विभाषी शिक्षा लागू करने की योजना बनाई है। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि सरकार इस व्यवस्था को मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में ही शुरू करना चाहती थी, लेकिन प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों की कमी के कारण इसे अगले वर्ष तक स्थगित करना पड़ा।
नई व्यवस्था के तहत प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को द्विभाषी शिक्षा दी जाएगी। इसकी शुरुआत कक्षा 1 से होगी। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और उनमें विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाना है।
मंत्री ने कहा कि अभिभावकों के बीच अंग्रेजी माध्यम और द्विभाषी शिक्षा की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार सरकारी स्कूलों में ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जहां विद्यार्थियों को मातृभाषा के साथ अंग्रेजी में भी बेहतर सीखने का अवसर मिले।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। विभाग 10,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की दिशा में काम कर रहा है, ताकि द्विभाषी कक्षाओं के संचालन के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।
सरकार का मानना है कि द्विभाषी शिक्षा से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और आकर्षण दोनों बढ़ेंगे। साथ ही ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को भी बेहतर भाषा कौशल और आगे की शिक्षा में अधिक अवसर मिल सकेंगे।
यह पहल कर्नाटक की सरकारी स्कूल शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है, जिसका सीधा असर नामांकन, सीखने के स्तर और स्कूलों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ सकता है।


