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मक्का अनुसंधान में ‘5एफ’ दृष्टिकोण अपनाने पर डॉ. एम.एल. जाट का जोर

‘बदलती दुनिया में भोजन, पशु-आहार, चारा, ईंधन और स्थिरता के लिए मक्का क्रांति’ विषय पर पहला अंतर्राष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026 हैदराबाद में शुरू हुआ

Published: 11:19am, 03 Nov 2026

‘बदलती दुनिया में भोजन, पशु-आहार, चारा, ईंधन और स्थिरता के लिए मक्का क्रांति’ विषय पर पहला अंतर्राष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026 हैदराबाद में शुरू हुआ। सम्मेलन में वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, कृषि संस्थानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने मक्का उत्पादन, अनुसंधान और वैल्यू-चेन को मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा की।

डीएआरई के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि भारत में मक्का उत्पादन लगभग 55 मिलियन टन तक पहुंच चुका है और अगले दशक में इसे 75 मिलियन टन तक ले जाने की जरूरत है। उन्होंने तकनीकी नवाचार, बेहतर फसल प्रबंधन और संसाधनों के कुशल उपयोग से उत्पादकता में 1.5 गुना वृद्धि पर जोर दिया।

डॉ. जाट ने पारंपरिक ‘4एफ’—फूड, फीड, फॉडर और फ्यूल के साथ किसानों को केंद्र में रखते हुए ‘5एफ’ दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों का असर किसानों के मुनाफे और आजीविका में दिखना चाहिए।

उन्होंने पैदावार के अंतर को कम करने के लिए प्रणाली-विज्ञान दृष्टिकोण, मजबूत बीज प्रणाली और गुणवत्तापूर्ण हाइब्रिड बीजों की उपलब्धता पर जोर दिया। साथ ही कहा कि मक्के का विस्तार इस तरह किया जाए कि तिलहन और दलहन की खेती प्रभावित न हो।

सम्मेलन में उच्च उत्पादकता, बेहतर पोषण गुणवत्ता, इनोवेटिव ब्रीडिंग, मशीनीकरण, इथेनॉल उत्पादन और टिकाऊ मक्का वैल्यू-चेन के लिए अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया गया।

Jitendra