भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) ने वर्ष 2026 के इफको साहित्य सम्मान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार रीता शुक्ला तथा इफको युवा साहित्य सम्मान के लिए लेखक एवं कवि सर्वेश तिवारी का चयन किया है। सर्वेश तिवारी को उनकी पुस्तक ‘पुण्यपथ’ के लिए यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। दोनों पुरस्कार 6 नवंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में दिए जाएंगे।
पुरस्कारों के चयन के लिए गठित समिति की अध्यक्षता प्रो. श्री भगवान सिंह ने की। समिति में वरिष्ठ साहित्यकार देवेंद्र कुमार बेहल, कवि प्रो. जितेंद्र श्रीवास्तव, लेखक-आलोचक अनंत विजय, उपन्यासकार मनीषा कुलश्रेष्ठ तथा सदस्य-सचिव डॉ. नलिन विकास शामिल थे।
रीता शुक्ला का साहित्यिक योगदान
14 नवंबर, 1949 को बिहार के डेहरी-ऑन-सोन में जन्मीं रीता शुक्ला ने साहित्य की विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके नाम नौ उपन्यास और 11 कहानी-संग्रह प्रकाशित हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘समाधान’, ‘बांधो न नाव इस ठांव’, ‘अरुंधति’ और ‘कितने जनम वैदेही’ शामिल हैं। उनकी कई कहानियों और उपन्यासों पर टेलीविजन धारावाहिक तथा टेलीफिल्में भी बनाई गई हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय पीड़ा का संवेदनशील चित्रण और मानव कल्याण की भावना प्रमुखता से दिखाई देती है।
‘पुण्यपथ’ के लिए सर्वेश तिवारी को सम्मान
बिहार के गोपालगंज में वर्ष 1988 में जन्मे सर्वेश तिवारी शिक्षक, कवि और लोकप्रिय लेखक हैं। उनकी अब तक प्रकाशित तीनों पुस्तकें ‘परत’, ‘पुण्यपथ’ और ‘पूर्णाहुति’ बेस्टसेलर रही हैं।
उनकी पुस्तक ‘पुण्यपथ’ एक पाकिस्तानी हिंदू परिवार के संघर्षों की कहानी प्रस्तुत करती है, जिसे अपना गांव छोड़कर भारत में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। पुस्तक में विभाजन के दौर की गलतियों, पाकिस्तान में रह गए हिंदुओं की परिस्थितियों तथा भारत आने के बाद विस्थापित परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।
2011 में हुई थी सम्मान की शुरुआत
इफको साहित्य सम्मान की स्थापना वर्ष 2011 में की गई थी। इस सम्मान का उद्देश्य ऐसे हिंदी साहित्यकारों को प्रोत्साहित करना है, जिनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति का प्रमुखता से चित्रण होता है। मुख्य साहित्य सम्मान के तहत 11 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है, जबकि युवा साहित्य सम्मान के विजेता को 2.5 लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं। दोनों पुरस्कारों के साथ प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न भी दिए जाते हैं।


