शिरोमणि पंजाब फोरम ने चेतावनी दी है कि 2026-27 में E20 कार्यक्रम से गन्ना आधारित एथेनॉल को बाहर रखने का असर पंजाब के गन्ना किसानों और सहकारी चीनी मिलों पर पड़ सकता है। फोरम ने कहा कि इससे जहां गन्ना आधारित एथेनॉल की मांग कमजोर हो सकती है, वहीं एथेनॉल, पोल्ट्री और डेयरी उद्योगों के कारण मक्का की मांग बढ़ने की संभावना है।
पूर्व पंजाब विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू द्वारा तैयार एक चर्चा पत्र में चावल आधारित एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी भूजल खपत पर भी चिंता जताई गई है। दस्तावेज में FCI के चावल का ईंधन उत्पादन में उपयोग करने की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाया गया है।
फोरम ने सुझाव दिया कि सहकारी चीनी मिलों के लिए B-heavy molasses के उपयोग को जारी रखा जाए ताकि गन्ना किसानों और मिलों को स्थिर मांग मिल सके। साथ ही एथेनॉल के विभिन्न फीडस्टॉक की कीमत तय करते समय उनके जल उपयोग को भी ध्यान में रखने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा खरीफ मक्का को बढ़ावा देने के लिए सुनिश्चित खरीद व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इससे किसानों को फसल विविधीकरण का विकल्प मिल सकता है और धान पर निर्भरता कम करने में भी मदद हो सकती है।
फोरम ने एथेनॉल नीति, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और सहकारी चीनी मिलों से जुड़े इन प्रस्तावों पर किसानों, उद्योग और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।


