कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ, जिसे लोकप्रिय रूप से गोकुल के नाम से जाना जाता है, के चुनाव में कांग्रेस समर्थित राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाडी ने 25 में से 16 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त हासिल की। इस पैनल का नेतृत्व विधान परिषद सदस्य सतेज पाटिल कर रहे थे। वहीं महायुति समर्थित पैनल को नौ सीटों पर संतोष करना पड़ा।
चुनाव में 99.96 प्रतिशत का बेहद ऊंचा मतदान दर्ज किया गया। कुल 25 सीटों के लिए 50 उम्मीदवार मैदान में थे। मुकाबला सतेज पाटिल के पैनल और महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था।
नतीजों में महायुति समर्थित कई प्रमुख उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। इनमें गोकुल के निवर्तमान अध्यक्ष नाविद मुश्रीफ, पूर्व अध्यक्ष अरुण डोंगाले और विश्वास पाटिल शामिल हैं। नाविद मुश्रीफ राज्य मंत्री हसन मुश्रीफ के पुत्र हैं। शौमिका महाडिक को बेहद करीबी मुकाबले में केवल सात मतों से हार मिली।
इस परिणाम के साथ प्रभावशाली दुग्ध सहकारी संस्था का नियंत्रण सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले पैनल की ओर जाता दिखाई दे रहा है। इससे कोल्हापुर के सहकारी क्षेत्र में उनकी राजनीतिक और संस्थागत स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।
गोकुल पश्चिम महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण दुग्ध सहकारी संस्थाओं में शामिल है। इसलिए इस चुनाव का असर केवल संघ के प्रबंधन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे क्षेत्र की सहकारी राजनीति और स्थानीय शक्ति संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


