प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में डाटा, ज्ञान और नवाचार शक्ति के नए स्रोत बनकर उभरे हैं। लेकिन वास्तविक चुनौती यह नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका उपयोग मानवता के कल्याण के लिए कैसे किया जाता है। प्रधानमंत्री ने भारत में पहली बार आयोजित हो रहे ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के लिए साझा अपने संदेश में यह बात कही।
प्रधानमंत्री ने ‘पावर टू एम्पावर’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य कुछ लोगों को शक्तिशाली बनाना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए अवसर पैदा करना होना चाहिए। ज्ञान का उपयोग विवाद के बजाय समझ बढ़ाने, धन का उपयोग अहंकार के बजाय परोपकार और शक्ति का उपयोग दूसरों पर नियंत्रण के बजाय उनकी रक्षा तथा सशक्तिकरण के लिए होना चाहिए।
भारत की डिजिटल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदार से लेकर बड़े कार शोरूम तक एक ही डिजिटल भुगतान प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। यह तकनीक की समावेशी क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले देश में कुछ सौ स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें लगभग आधे छोटे शहरों और कस्बों से हैं तथा 45 प्रतिशत स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है।
वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा, खनिज और तकनीक जैसे सहयोग के माध्यम अब दबाव बनाने के साधन बनते जा रहे हैं।
उन्होंने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और कोविन जैसे डिजिटल मंचों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं का उपयोग नागरिकों को सशक्त बनाने के साथ अन्य देशों के लिए भी नए अवसर विकसित करने में कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वास्तविक प्रगति तभी सार्थक होगी, जब तकनीक और नवाचार का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा भारत की क्षमताएं पूरी मानवता के लिए उपयोगी बनें


