प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन में वर्ष 2100 तक मानव सभ्यता के सामने गंभीर वैश्विक खतरों की चेतावनी दी गई है। ‘द लैंसेट कमीशन ऑन 21वीं सेंचुरी ग्लोबल थ्रेट्स टू हेल्थ’ की रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दुरुपयोग और परमाणु युद्ध को मानव अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर संभावित खतरों में शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य, विज्ञान और वैश्विक नीति से जुड़े 35 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने यह अध्ययन तैयार किया है। आयोग के सह-अध्यक्ष प्रोफेसर क्रिस्टोफर मरे और डॉ. नतालिया कानेम हैं। रिपोर्ट में 17 प्रमुख वैश्विक खतरों का आकलन किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव विलुप्ति जैसी घटनाओं की संभावना कम हो सकती है, लेकिन इनके परिणाम विनाशकारी होंगे।
एआई और परमाणु युद्ध से बड़ा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, उन्नत एआई तकनीक का दुरुपयोग घातक जैविक हथियार विकसित करने में हो सकता है। ऐसे जैविक एजेंट अनियंत्रित होकर वैश्विक महामारी पैदा कर सकते हैं। दूसरी ओर, बड़े पैमाने पर परमाणु युद्ध से निकलने वाला धुआं सूर्य के प्रकाश को बाधित कर सकता है। इससे तापमान गिरने, कृषि उत्पादन प्रभावित होने और वैश्विक खाद्य संकट उत्पन्न होने का खतरा है।
भारत के लिए वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन चुनौती
अध्ययन में भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों के लिए वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा को प्रमुख चुनौतियां बताया गया है। पराली जलाने जैसी गतिविधियां प्रदूषण बढ़ाती हैं। वहीं, बढ़ता तापमान, सूखा, बाढ़ और समुद्र का बढ़ता जलस्तर कृषि, स्वास्थ्य तथा आजीविका को प्रभावित कर सकते हैं। जलवायु परिवर्तन से बच्चों में कुपोषण और मलेरिया तथा डेंगू जैसी बीमारियों के प्रसार का जोखिम भी बढ़ सकता है।
बचाव के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी
आयोग ने मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियां विकसित करने, नई चिकित्सा तकनीकों में निवेश बढ़ाने और उच्च जोखिम वाली एआई तकनीकों पर प्रभावी नियंत्रण की सिफारिश की है। साथ ही नियमित वैश्विक जोखिम निगरानी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आपदाओं से पहले प्रभावी तैयारी पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट का मुख्य संदेश है कि संभावित संकटों की रोकथाम के लिए सरकारों को अभी से दीर्घकालिक रणनीतियां अपनानी होंगी।


