देशभर के स्कूलों में दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नई पहल की है। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्रशस्त (PRASHAST) पोर्टल के माध्यम से समावेशी शिक्षा पर आधारित 30 मिनट के विशेष जागरूकता मॉड्यूल का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आयोजित किया।
मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान में 60 हजार से अधिक स्कूलों ने भाग लिया है, जबकि पिछले तीन महीनों में 72 लाख से अधिक शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के प्रति जागरूक किया जा चुका है।
यह विशेष मॉड्यूल 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इसका उद्देश्य प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, विशेष शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को दिव्यांग बच्चों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाना है। इसमें व्यावहारिक उदाहरणों और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के लिए सुरक्षित, सुलभ और सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करने की जानकारी दी गई है।
प्रशस्त पोर्टल एक स्कूल आधारित डिजिटल उपकरण है, जो बच्चों में संभावित दिव्यांगता की शुरुआती पहचान में सहायता करता है। इसकी दो चरणों वाली जांच प्रक्रिया में शिक्षक बच्चों के व्यवहार और अन्य संकेतों का आकलन करते हैं। इसके बाद विशेष शिक्षक आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय परीक्षण की सिफारिश करते हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने समावेशी शिक्षा को पूरे विद्यालय की साझा जिम्मेदारी बताया है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुरूप सभी बच्चों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।


