उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता के प्रमुख आधार के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। देहरादून में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित Uttarakhand Cooperative Summit 2026 में राज्य के सहकारी विकास, ग्रामीण उद्यम और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026 को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाना और ग्रामीण आर्थिक विकास में उनकी भूमिका का विस्तार करना है।
जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विजन के अनुरूप उत्तराखंड में सहकारिता को किसानों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से उत्पादन, विपणन, वित्तीय सेवाओं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।
नई सहकारिता नीति से राज्य में सहकारी संस्थाओं के विकास के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप तैयार होने की उम्मीद है। इसके जरिए संस्थागत क्षमता बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देने और सहकारी नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
समिट में उद्योग और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने उत्तराखंड में सहकारी मॉडल के विस्तार, ग्रामीण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और स्थानीय संसाधनों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के संभावित तरीकों पर विचार साझा किए।
कुल मिलाकर, Uttarakhand Cooperative Summit 2026 ने राज्य की नई सहकारिता नीति को ग्रामीण विकास, किसान सशक्तीकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की व्यापक रणनीति से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।


