गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमित चावड़ा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCS) को ज्ञापन सौंपकर राज्य के सहकारी बैंकों में लंबित चुनाव, प्रबंध समितियों का कार्यकाल और निदेशकों की कानूनी स्थिति से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ. तुषार चौधरी सहित अन्य नेता और सहकारी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल थे। समकालीन मीडिया रिपोर्टों ने भी कांग्रेस द्वारा सहकारी बैंकों में चुनाव कराने और आवश्यक होने पर प्रशासक नियुक्त करने की मांग की पुष्टि की है।
ज्ञापन में गुजरात स्टेट कोऑपरेटिव बैंक और कई जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की प्रबंध समितियों के कार्यकाल की कानूनी स्थिति की जांच कर लंबित चुनाव पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से कराने की मांग की गई है। जहां कानून के तहत आवश्यक हो, वहां प्रशासक नियुक्त करने का भी आग्रह किया गया है।
अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के चुनाव में कथित लंबे विलंब का मामला भी उठाया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इस विषय में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित न्यायालयीन आदेश, प्रकरण संख्या और प्रमाणित अभिलेखों की जांच की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने निदेशकों की पात्रता, कार्यकाल, निर्वाचन, नियुक्ति, सह-नामांकन और पुनर्नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड की निदेशक-वार समीक्षा की मांग की है। इसमें RBI के शासन संबंधी नियामकीय प्रावधानों और लागू सहकारी कानूनों को ध्यान में रखकर वैधानिक स्थिति तय करने की बात कही गई है। RBI के नियामकीय ढांचे में सहकारी बैंकों के निदेशकों और बोर्ड के शासन से जुड़े विशेष प्रावधान मौजूद हैं।
ज्ञापन में प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों के पंजीकरण तथा दुग्ध उत्पादकों को दिए जाने वाले बोनस में अधिक पारदर्शिता की मांग भी शामिल है। कांग्रेस ने चुनाव, बोर्ड कार्यकाल, सदस्यों के अधिकार और सहकारी संस्थाओं के संचालन से जुड़े मामलों में समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।


