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भारत महिला हॉकी टीम स्वर्ण पदक के लिए चैंपियन चीन से भिड़ेगी

इशिका व सलीमा के एक एक गोल भारत ने सेमीफाइनल द. कोरिया को दी शिकस्त

नवोदित स्ट्राइकर इशिका और कप्तान सलीमा टेटे के एक एक बेहतरीन गोल की बदौलत भारतीय महिला हॉकी टीम ने मजबूत से अपने किले की चौकसी करने वाली दक्षिण कोरिया के खिलाफ धैर्य धर कर काकामिगहारा(जापान) में एशियाई खेलों के दूसरे सेमीफाइनल में 2-0 से जीत दर्ज की। भारतीय महिला हॉकी अब फाइनल में स्वर्ण के लिए मौजूदा चैंपियन चीन से शुक्रवार को भिड़ेगी। भारतीय महिला हॉकी टीम ने अब से पहले एशियाई खेलों में स्वर्ण मात्र एक बार दिल्ली में1982 में अपने सभी पांचों में जीत कर अपने नाम किया और तब दक्षिण कोरिया ने दूसरे स्थान पर रह रजत और मलयेशिया ने तीसरे स्थान पर तब कांसा जीता था । भारतीय महिला हॉकी टीम को  एशियाई खेलों में 1998 बैंकॉक मे फाइनल में दक्षिण कोरिया से और 2018 में जकार्ता में जापान से फाइनल में 1-2से हारने पर उसे रजत पदक पर ही संतोष करना पड़ा। हांगजू में भारत ने जापान को हरा कर कांसा जीता था।

चैंपियन  चीन ने मेजबान जापान को पहले सेमीफाइनल में निर्धारित समय में गोलरहित रहने के बाद शूटआउट में 4-2से हरा कर लगातार दूसरी बार फाइनल में स्थान बनाया।

भारत को मैच में दस पेनल्टी कॉर्नर मिले और इसमें तीसरा क्वॉर्टर खत्म होने से ठीक मिनट भरनौवें पर ड्रैग फ्लिकर दीपिका सहरावत के चतुराई से सीधे गेंद को फ्लिक न कर बाएं वापस पुशर इशिका की ओर बढ़ाई और उन्होंने संभवत: इस मैच का सबसे दर्शनीय और अहम गोल था। दक्षिण कोरिया को मैच के आखिरी दो मिनट में लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन इन पर भारत की कप्तान आक्रामक सेंटर हाफ और रशर सलीमा टेटे की तारीफ करनी होगी उन्होंने सही वक्त पर तेज फर्राटा लगा इन्हें रोक कर अपनी टीम को जीत दिलाई। दक्षिण कोरिया की ताकत मजबूती से अपने किले की चौकसी के साथ जोरदार जवाबी हमले थी । दक्षिण कोरिया ने मजबूती से अपने किले की चौकसी तीसरे क्वॉर्टर के आखिर तक जरूर की लेकिन जवाबी हमले केवल आखिर दो मिनट में ही बोल पाई।

भारत की स्ट्राइकर अनुभवी नवनीत कौर, नवोदित इशिका, ऋतुजा डडासो पिसल और ललरेमसियामी ने मध्यपंक्ति में नेहा गोयल और सुनीलिता टोपो द्वारा बराबर आगे बढ़ाई गेंद पर दक्षिण कोरिया के गोल पर बराबर हमले बोलने के साथ शुरू के दो हाफ में सात पेनल्टी कॉर्नर भी दिलाए। दक्षिण कोरिया की रक्षापंक्ति में यूजिन किम, कप्तान यूरी ली, सूजिन ऐन के साथ गोलरक्षक सियोयूइन ली ने मुस्तैदी दिखाते हुए मुस्तैदी दिखाते हुए भारत के हर हमले और पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने की कोशिश को को नाकाम कर दिया। भारत के चीफ कोच शुएर्ड मराइन इसके चलते हाफ टाइम से पहले बहुत परेशान नजर आए। दक्षिण कोरिया ने मौजूदा चैंपियन चीन को भी  अपने अंतिम पूल मैच में 40 मिनट तक तक जिस तरह गोलरहित बराबर पर रोका था उससे भारतीय महिला हॉकी टीम और चीफ कोच मराइन को परेशान होने की बजाय यह समझना जरूरी था उसके खिलाफ जीत के लिए जोश के खासतौर पर डी के भीतर धैर्य की जरूरत हे।

ड्रैग फ्लिकर दीपिका सहरावत ने नौवें पेनल्टी कॉर्नर पर सीधे तेज ड्रैग फ्लिक करने की बजाय गेंद को पुश करने वाली बाएं इशिका की ओर गेंद को पुश किया और उन्होंने मैच के 44 वें मिनट में तेज स्लैप शॉट से गोल कर आखिर दक्षिण कोरिया का किला बिखेर कर भारत को 1-0से आगे कर दिया। कप्तान सलीमा टेटे दाएं से गेंद को लेकर डी में पहुं दक्षिण कोरिया की गोलरक्षक सियोयूइन ली को छका गेंद को चतुराई से फ्लिक कर गोल में डाल कर भारत को चृथे और आखिरी क्वॉर्टर के तीसरे मिनट में 2-0 से आगे कर दिया।  भारत की स्ट्राइकर नवनीत कौर, इशिका, ज्योति और ललरेमसियामी की दरअसल हाफ टाइम के बाद गेंद को तब तक गेंद को अपने कब्जे में रखने की रणनीति कारगर रही जब तक साथी खिलाड़ी गेंद को लेकर दक्षिण कोरिया की डी में पहुंचने की स्थिति में न हो। भारतीय टीम का धैर्य से खेलना रंग लाया और आखिरी 16 मिनट में उसने दो गोल कर आखिरकार सेमीफाइनल जीत लिया।

मौजूदा चैंपियन चीन ने मेजबान जापान की महिला टीम को पहले सेमीफाइनल में निर्धारित समय में गोलरहित बराबर रहने के बाद शूटआउट में 4-2 से हराया। शूटआउट में चीन के लिए चेनचेंग लियू,निंग मा, वेन दान , जियांगशिन ने गोल किए जबकि केवल पहले प्रयास में होंग ली के प्रयास को जापान की गोलरक्षक  आकियो तनाका ने रोक कर बेकार किया। वहीं जापान के लिए पहले पर हिरोका मुरायामा और आखिरी पर मियू हसीजावा ही गोल कर पाई जबकि शियो कोबायाकावा व नकारी नाकागोमी गोल करने में नाकाम रही।

YuvaSahakar Desk