एविएशन सेक्टर में करियर बनाने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए 12वीं के बाद कई विकल्प मौजूद हैं। इस क्षेत्र में केवल पायलट ही नहीं, बल्कि एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर, केबिन क्रू, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC), ग्राउंड स्टाफ, एयर कार्गो मैनेजर और एयर टिकटिंग जैसे क्षेत्रों में भी करियर बनाया जा सकता है। अलग-अलग पदों के लिए योग्यता और ट्रेनिंग की जरूरत भी अलग होती है।
पायलट बनना एक प्रमुख विकल्प
एविएशन सेक्टर में पायलट सबसे लोकप्रिय करियर विकल्पों में से एक है। 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स वाले छात्र पायलट ट्रेनिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं। जरूरी ट्रेनिंग और लाइसेंस हासिल करने के बाद एयरलाइंस में अवसर मिल सकते हैं। अनुभव और पद के साथ पायलट की आय भी बढ़ती है। शुरुआती स्तर पर जूनियर फर्स्ट ऑफिसर को करीब 80 हजार से 1.5 लाख रुपये, जबकि फर्स्ट ऑफिसर को 1.5 लाख से 3.5 लाख रुपये मासिक तक मिल सकता है। कैप्टन के स्तर पर यह आय कई लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है।
केबिन क्रू में भी अवसर
एयर होस्टेस और फ्लाइट स्टूअर्ड यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखते हैं। 12वीं के बाद इस क्षेत्र से जुड़े करीब एक साल के कोर्स किए जा सकते हैं। अच्छे कम्युनिकेशन स्किल और ग्राहक सेवा में रुचि इस करियर में मददगार होती है। शुरुआती सैलरी करीब 35 से 40 हजार रुपये प्रति माह हो सकती है।
मेंटेनेंस और ATC में करियर
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर विमान की तकनीकी जांच और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालते हैं। PCM से 12वीं करने वाले छात्र संबंधित डिग्री या तीन वर्षीय डिप्लोमा कर सकते हैं। फ्रेशर्स को करीब 35 से 55 हजार रुपये मासिक वेतन मिल सकता है।
एयर ट्रैफिक कंट्रोलर विमानों की आवाजाही को नियंत्रित करते हैं और पायलटों को टेकऑफ व लैंडिंग से जुड़ी जानकारी देते हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ भी एविएशन ऑपरेशंस का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एयर कार्गो और टिकटिंग भी विकल्प
एयर कार्गो मैनेजर सामान की लोडिंग, स्टोरेज और डिलीवरी की निगरानी करते हैं। 6 से 9 महीने के डिप्लोमा के बाद इस क्षेत्र में शुरुआत की जा सकती है। एयर टिकटिंग कोर्स में टिकट बुकिंग, एयरलाइन कोड, पासपोर्ट-वीजा और ट्रैवल मैनेजमेंट की जानकारी दी जाती है।
एविएशन से जुड़े कोर्स के लिए विभिन्न फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों और एविएशन अकादमियों के विकल्प मौजूद हैं। किसी संस्थान में दाखिला लेने से पहले कोर्स की मान्यता, फीस, पात्रता और प्लेसमेंट की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।


