भारत ने पूल ए में चार मैचों में 39 गोल किए और मात्र चार गोल खाए और उसके चार जीत के साथ 12 अंक हैं। जापान की दक्षिण कोरिया की तरह चार मैचों में यह पहली हार थी और इन दोनों के तीन जीत और भारत के खिलाफ इकलौती हार के साथ साथ तीन तीन जीत के साथ नौ अंक हैं। जापान (+23) की टीम दक्षिण कोरिया ( +9) से बेहतर गोल अंतर के चलते पूल में फिलहाल दूसरे स्थान पर है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम को अपना आखिरी पूल मैच बांग्लादेश के खिलाफ सोमवार को खेलना है जो कि अपने चार में से दो मैच जीता और दो हारा है और उसके कुल छह अंक हैं।
भारत को अभिषेक, राजिंदर सिंह और सुखजीत सिंह ने मैच के शुरू के आठ मिनट में तीन पेनल्टी कॉर्नर दिलाए लेकिन इनमें कप्तान ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह के तेज ड्रैग फ्लिक में दो को शुरू में जापान के गोलरक्षक तकाशी योशीकावा ने रोका और तीसर पर हीरो साइतो ने गोलरेखा पर गेंद को रोक कर भारत को गोल करने से रोका मैच के और मैच के 11 वें मिनट में जापान के काजूमासा मात्सोमोता ने कोसाई कवाबे के पास सूरज करकेरा को छका जब गेंद को गोल में डाली तो लगा गोल हो गया लेकर इससे पहले काजूमासा का फाउल हो गया था और यह गोल अमान्य करार दिया। सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह और अभिषेक नैन ने राजिंदर सिंह और हार्दिक सिंह द्वारा आगे बढ़ाई गेंद पर जापान के गोल पर दबाव बनाया। अभिषेक नैन ने पहला क्वॉर्टर खत्म होने से ठीक पहले सुखजीत सिंह के पास बहुत धैर्य दिखाते हुए गेंद को गोल में फ्लिक कर गोल कर भारत का खाता खोला। भारत की टीम पहला क्वॉर्टर खत्म होने तक 1-0 से आगे थी।
जापान ने बराबरी पाने की कोशिश मे दूसरे क्वॉर्टर में आक्रामक अंदाज में आगाज किया और काजूमासा मात्सोमोतो ने दाएं से भारत के गोल पर दबाव बना तेज हमले लेकिन भारत के गोलरक्षक मोहित शशिकुमार ने उनके गोल के प्रयासों को नाकाम किया। जापान को दूसरे क्वॉर्टर के पहले ही मिनट में मिले मैच के दूसरे पेनल्टी कॉर्नर पर कोसाई कवाबे के फ्लिक को भारत के रशर अमित रोहिदास ने आगे बढ़ कर रोक उसे बराबरी पाने से रोका। अभिषेक को गलत ढंग से रोकने पर भारत को मैच के 21 वें मिनट में चौथा पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन इस बार जुगराज सिंह के फ़्लिक को जापान के गोलरक्षक तकाशी योशीकावा ने रोक कर बेकार कर दिया। भारतीय टीम हाफ टाइम तक 1-0से आगे थी।
मैन टू मैन मार्किंग कर अपने किले की मजबूत चौकसी करने वाली जापान की टीम के खिलाफ गोल करने के लिए भारतीय अग्रिम पंक्ति को जिस तरह के धैर्य की जरूरत थी वह उसने तीसरे क्वॉर्टर के शुरू में दिखाया। भारत की मध्यपंक्ति में विवेक सागर प्रसाद , हार्दिक सिंह और सुमित ने बेवजह जापान के गोल पर शॉट लेने के बजाय गेंद को अपने कब्जे में रख सही वक्त पर हमला बोलने की नीति अपनाई।


