प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करते हुए भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च का प्रमुख केंद्र बनाने पर जोर दिया। सम्मेलन में 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसका विषय ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय युवाओं और रिसर्चरों से भी सेमीकंडक्टर मिशन से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत में रिसर्च कर रहे युवा आगे आएं और विदेशों में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे भारतीय शोधकर्ता भी देश में नई तकनीकों के विकास में योगदान दें। उन्होंने उद्योग जगत से देश में R&D को लीड करने की अपील करते हुए कहा कि इससे उद्योग के साथ भारत की युवाशक्ति को भी फायदा मिलेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार एक लाख इंजीनियरिंग छात्रों को सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए प्रशिक्षित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है और करीब 70 हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार की सेमीकंडक्टर प्रतिभा विकास पहलों के तहत चिप डिजाइन और संबंधित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने वैश्विक सप्लाई चेन का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया अब मैन्युफैक्चरिंग के लिए नई और भरोसेमंद लोकेशन तलाश रही है और भारत इसके लिए लगातार अपनी क्षमता तैयार कर रहा है।
उन्होंने AI को सेमीकंडक्टर उद्योग की वृद्धि का प्रमुख चालक बताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार की वृद्धि 20 प्रतिशत से अधिक रही है। AI की बढ़ती मांग के कारण चुनौती केवल बेहतर चिप बनाने तक सीमित नहीं है। मेमोरी, प्रोसेसर, पैकेजिंग, डिजाइन, रिसर्च और पूरी सप्लाई चेन को साथ विकसित करना होगा।
सरकार ने Semicon 2.0 में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, R&D और टैलेंट डेवलपमेंट को प्रमुख स्तंभ बनाया है।


