देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों यानी IITs की कक्षाओं में अब महिला छात्रों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। इंजीनियर्स डे 2026 के मौके पर सामने आए दाखिला आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच IIT में प्रवेश लेने वाली छात्राओं की संख्या में करीब 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
देश के 23 IITs में वर्ष 2019 में कुल 2,416 महिला छात्रों को सीटें आवंटित हुई थीं। उस समय कुल दाखिलों में महिलाओं की हिस्सेदारी 17.76 प्रतिशत थी। वर्ष 2025 में महिला छात्रों की संख्या बढ़कर 3,664 हो गई और उनकी हिस्सेदारी 20.15 प्रतिशत तक पहुंच गई।
इस दौरान IIT में कुल सीट आवंटन 13,604 से बढ़कर 18,188 हुआ, यानी करीब 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई। खास बात यह है कि महिला छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी कुल सीटों के विस्तार से काफी तेज रही है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने IIT में सुपरन्यूमेरेरी सीटों की व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत छात्राओं के लिए अतिरिक्त सीटें जोड़ी गईं, लेकिन सामान्य श्रेणी की सीटों में कोई कटौती नहीं की गई। लक्ष्य महिला भागीदारी को चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत तक पहुंचाना था।
2025 के आंकड़ों में IIT तिरुपति में महिला छात्रों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 21.57 प्रतिशत रही। IIT मद्रास में यह 21.09 प्रतिशत, IIT दिल्ली और IIT इंदौर में 20.63 प्रतिशत रही। IIT बॉम्बे में महिला हिस्सेदारी 19.57 प्रतिशत और IIT खड़गपुर में 19.19 प्रतिशत दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से साफ है कि अब महिला भागीदारी कुछ चुनिंदा IIT तक सीमित नहीं है। लगभग सभी परिसरों में हर पांच विद्यार्थियों में से करीब एक छात्रा है। इंजीनियरिंग के शीर्ष संस्थानों में यह बदलाव तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।


