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बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है

Plea Seeks Mandatory Parental Consent for Children Using Digital Platforms


Published: 14:53pm, 10 Sep 2026

नई दिल्ली: 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में मांग की गई है कि नाबालिगों को सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की अनुमति देने से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावक की अनिवार्य सहमति सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह याचिका गैर सरकारी संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फेसबुक और स्नैपचैट जैसे कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 13 वर्ष की आयु से उपयोगकर्ताओं को खाता बनाने की अनुमति देते हैं जबकि भारतीय कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को नाबालिग माना जाता है।

याचिका में मांग की गई है कि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म और नाबालिग के बीच होने वाला कोई भी समझौता या अनुबंध अभिभावक की सहमति के बिना मान्य न हो। इसके लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की पहचान और इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन की व्यवस्था लागू करने का सुझाव भी दिया गया है।

याचिका में बच्चों के स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े संभावित खतरों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, मानव तस्करी, साइबर बुलिंग, निजी जानकारी का दुरुपयोग और बच्चों की गतिविधियों की डिजिटल निगरानी शामिल हैं। इसके अलावा उम्र के अनुरूप न होने वाली सामग्री तक बच्चों की आसान पहुंच को भी गंभीर चिंता बताया गया है।

अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि नाबालिगों के डिजिटल प्लेटफॉर्म इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा उपायों और अभिभावकीय सहमति की आवश्यकता पर आगे क्या दिशा-निर्देश दिए जाएं।

Jitendra