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एशियाई खेलों में पुरुष व महिला हॉकी टीमों से स्वर्ण जीत सीधे ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने का भरोसा: दिलीप तिर्की

एशियाई खेलों में हमारी रक्षापंक्ति को और मुस्तैदी दिखाने के साथ क्षणिक गलतियों से बचने और दोनों गोलरक्षकों - सूरज करकेरा और मोहित एचएस को और ज्यादा भरोसे और विश्वास से किले की चौकसी की जरूरत होगी। हमारे लिए अच्छी बात यह रही कि हमारी पुरुष ही नहीं महिला हॉकी टीम की हर खिलाड़ी एशियाई खेलों की अहमियत से वाकिफ है और इसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर खिताब जीत कर 2028 ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने में कोई कसर नहीं छोडेंगी।

पूर्व हॉकी ओलंपियन व कप्तान और हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों के आईची-नगोया (जापान) में होने वाले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर सीधे 2028 के लॉस एंजेल्स ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने का भरोसा जताया है। दिलीप तिर्की ने खास बातचीत में कहा, ‘नीदरलैंड और बेल्जियम में एफआईएच पुरुष और महिला हॉकी विश्व कप 2026 में हमारी लड़कियों ने 1974 के पहले संस्करण में चौथे स्थान पर रहने के बाद अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को बराबरी पर रोक, केवल उपविजेता नीदरलैंड से करीबी मैच में 0-2 से हार, दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से जर्मनी जैसी मजबूत टीम को 3-1 से हरा पांचवें स्थान पर रह कर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर सीधे 2028 ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने की आस जगाई है। बेशक चीन की महिला टीम बहुत मजबूत टीम है और वह विश्व कप में हमारी लड़कियों द्वारा दो-दो की बराबरी पर रोके जाने को लेकर पलटवार करने को बेताब होंगी। बावजूद इसके भारतीय महिला हॉकी टीम उससे पूरी शिद्दत से मुकाबले को तैयार हैं।

दिलीप तिर्की ने कहा कि बेशक चीन से मुकाबला कड़ा होगा लेकिन हमें उसके खिलाफ अपनी टीम के कसौटी पर खरा उतरने की उम्मीद है। हालांकि इससे पहले हमें मेजबान जापान के खिलाफ ही नहीं, हरेक टीम के खिलाफ चौकस रहना होगा। जहां तक भारत की पुरुष हॉकी टीम के विश्व कप 2026 में आठवें स्थान पर रहने की बात है तो वहां हमारी टीम ने टुकड़ों-टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन किया और खासतौर पर इंग्लैंड के खिलाफ बढ़त लेने के बाद रक्षापंक्ति की कुछ क्षणिक गलतियों के चलते हार से हमारा सब गणित गड़बड़ा गया। एशियाई खेलों में हमारी रक्षापंक्ति को और मुस्तैदी दिखाने के साथ क्षणिक गलतियों से बचने और दोनों गोलरक्षकों – सूरज करकेरा और मोहित एचएस को और ज्यादा भरोसे और विश्वास से किले की चौकसी की जरूरत होगी। हमारे लिए अच्छी बात यह रही कि हमारी पुरुष ही नहीं महिला हॉकी टीम की हर खिलाड़ी एशियाई खेलों की अहमियत से वाकिफ है और इसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर खिताब जीत कर 2028 ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने में कोई कसर नहीं छोडेंगी।

उन्होंने कहा कि हॉकी विश्व कप में हमारे लिए अच्छी बात यह रही कि हमारी पुरुष हॉकी टीम के कप्तान ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर सबसे ज्यादा आठ गोल किए। वह सबसे ज्यादा गोल करने वाले तीन शीर्ष खिलाड़ियों में रहे, जबकि हमारे स्ट्राइकर – अभिषेक (तीन), सुखजीत सिंह (2) और दिलप्रीत (1) मिलकर कुल छह मैदानी गोल ही कर पाए। हमें अपने स्ट्राइकर से एशियाई खेलों में ज्यादा मैदानी गोल की उम्मीद है। जहां तक चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ मैच की बात है तो उसके खिलाफ अब लंबे समय से हमारा दबदबा रहा है। 2022 एशियाई खेलों में हांगजू में हमने पाकिस्तान को 10-2 से और अभी बीते महीने पुरुष हॉकी विश्व कप में 5-3 से हराया। इस बार पाकिस्तान की टीम हमारे पूल में नहीं है और इससे शुरू में मुकाबला नहीं होगा।

दिलीप तिर्की के अनुसार, पाकिस्तान के खिलाफ हमारे मैच हमेशा सभी का ध्यान खींचते हैं। पाकिस्तान के खिलाफ मैच में हॉकी कौशल से ज्यादा चुनौती अपनी भावनाओं पर काबू रखने की होती है। बावजूद इसके मैं कहूंगा कि हमारी पुरुष हॉकी टीम पाकिस्तान के खिलाफ उससे पार पाने के लिए जेहनी तौर पर बेहतर तैयार है। हमारी हॉकी विश्व कप में खेलने वाली टीम में मात्र एक बदलाव आदित्य अर्जुन लालगे की जगह एशियाई खेलों के लिए राज कुमार पाल को शामिल करके किया गया है। दरअसल एशियाई खेलों के लिए टीम में बहुत पहले देने पड़ती है और इसीलिए इसमें ज्यादा बदलाव की गुंजाइश नहीं है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए जहां तक आगे बदलाव की बात है तो तब की तब सोचेंगे। फिलहाल हमें अपनी मौजूदा भारत पुरुष हॉकी टीम से ही एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक बरकरार रखने का पूरा भरोसा है। जहां तक चीफ कोच क्रेग फुल्टन के मध्यपंक्ति में मैच दर मैच कभी यशदीप सिवाच, कभी आदित्य लालगे, कभी नीलकांत शर्मा, कभी विवेक सागर प्रसाद को अलग अलग मैचों में आजमाने की बात यह संभवत: उनकी रणनीति का हिस्सा रहा होगा। एशियाई खेलों में बेशक चीफ कोच फुल्टन हर मैच के मुताबिक सर्वश्रेष्ठ भारतीय टीम उतारेंगे क्योंकि उन्हें इसकी अहमियत मालूम है।’

दिलीप तिर्की ने कहा, ‘जहां तक हमारी भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम के विश्व कप में परंपरागत नीले रंग की बजाय केसरिया रंग की जर्सी पहन कर खेलने की बात है तो टीम के रवाना होने से पहले भी और बाद में भी साफ किया यह कोई स्थायी रंग नहीं है। हम अतीत में नीले और अन्य रंगों की जर्सी पहन कर भारत के लिए खेले हैं। इस बात भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने जब हमसे एशियाई खेलों के लिए जर्सी के रंग की बाबत हमारी पहली प्राथमिकता पूछी तो हमने उसे नीले रंग की जर्सी को पहली पसंद बताया है। एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी की पहली पसंद नीला रंग होगा और केसरिया रंग की जर्सी दूसरी पसंद होगी। विश्व कप से पहले नीली टर्फ पर नीले रंग की जर्सी में टीम के साथी खिलाड़ी को देखने में दिक्कत आने पर  केसरिया रंग की जर्सी को तवज्जो दी गई थी। एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी टीम के लिए नीला रंग भले पहला और केसरिया दूसरी पसंद है लेकिन यह भी कोई स्थायी विकल्प नहीं है। आगे भी इसमें जरूरत के मुताबिक बदलाव मुमकिन है। जहां तक पुरुष और महिला हॉकी विश्व कप में केसरिया रंग की जर्सी पहन कर खेलने की बात है तो इससे वहां टीम को इसे पहन खेलने में कोई दिक्कत नहीं आई।’

एशियाई खेलों में फोकस एक समय एक मैच पर : हरमनप्रीत सिंह

दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में मौजूदा चैंपियन भारतीय पुरुष हॉकी टीम एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 में आठवें स्थान की निराशा को भुला कर आईची नगोया (जापान) में एशियाई खेलों में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखने के संकल्प के साथ मंगलवार रात जापान रवाना हो गई। भारत की पूरी कोशिश 2023 में हांगजू एशियाई खेलों में जीता अपना स्वर्ण पदक बरकरार रख सीधे 2028 के लॉस एंजेल्स ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने की है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने विश्व कप में टुकड़ों टुकड़ों में ही अपनी चमक दिखाई और निरंतरता का उसके खेल में अभाव दिखा। इसी के चलते वह इंग्लैंड और बेल्जियम से करीबी मैच हारी। विश्व कप में अपने प्रदर्शन की गलतियों से सबक लेकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम जापान में एशियाई खेलों में सधा प्रदर्शन कर खिताब बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने बीते एक दशक में बढ़िया प्रदर्शन कर खुद को एशियाई हॉकी की बड़ी ताकत साबित किया है। भारत ने 2023 में हांगजू एशियाई खेलों तथा एशिया कप में स्वर्ण पदक जीता। भारत बेशक एक बार फिर एशियाई खेलों में अपना दबदबा बरकरार रखने को बेताब होगा और इसमें स्वर्ण पदक जीत फिर सीधे एक 2028 ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने में कसर नहीं छोड़ेगा। भारत के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा,‘ हम फिलहाल बहुत आगे की नहीं सोचना चाहते। एशियाई खेलों में हमारा फोकस एक समय केवल एक मैच पर होगा। कोई मैच आसान नहीं होगा क्योंकि आप निरंतर बढ़िया प्रदर्शन कर चाहते हैं और जरा सी भी ढील गवारा नहीं कर सकते। हमारा लक्ष्य हर मैच में बेहतर प्रदर्शन कर नॉकआउट चरण में सही समय पर अपनी रंगत पाना है।’ वहीं विश्व कप में टीम के आठवें स्थान पर रहने पर आलोचकों के निशाने पर रहे भारत के चीफ कोच क्रेग फुल्टन एशियाई खेलों में नतीजों से ज्यादा अपने खिलाड़ियों से ध्यान योजना को अमली जामा पहनाने पर लगाना चाहते हैं।

चार बार की चैंपियन भारत की पुरुष हॉकी टीम आईची-नगोया (जापान) में होने वाले एशियाई खेलों में पूल ए में जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ है। मौजूदा चैंपियन भारतीय पुरुष हॉकी टीम एशियाई खेलों में अपने अभियान का आगाज 20 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ मैच से कर आखिरी पूल मैच 28 सितंबर को बांग्लादेश से खेलेगी। एशियाई खेलों में पुरुष वर्ग के दोनों सेमीफाइनल 1 अक्टूबर को और फाइनल 3 अक्टूबर को खेला जाएगा। भारतीय पुरुष हॉकी टीम अपना दबदबा बनाए रख कर लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीत कर सीधे 2028 के ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर स्वर्ण लौटना चाहेगी।

एशियाई खेलों के लिए भारतीय पुरुष हॉकी टीम

गोलरक्षक : सूरज करकेरा, मोहित एचएस।

रक्षापंक्ति : हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, संजय, सुमित, जुगराज सिंह, जर्मनप्रीत सिंह, यशदीप सिवाच।

मध्यपंक्ति : मनप्रीत सिंह,  राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा, राजिंदर सिंह।

अग्रिम पंक्ति : अभिषेक नैन, सुखजीत सिंह, शिलानंद लाकरा, दिलप्रीत सिंह, मनदीप सिंह।

YuvaSahakar Team