नई दिल्ली: सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी भवन गिरने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली सरकार ने छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार अगले एक से डेढ़ महीने में राजधानी के पेइंग गेस्ट यानी पीजी आवास और कोचिंग संस्थानों के लिए व्यापक नीति और एक साझा वेब पोर्टल सामने लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने पीजी में रहने वाले विद्यार्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। छात्रों ने किराया, सुविधाओं, सुरक्षा और पीजी संचालकों के साथ होने वाले समझौतों से जुड़ी शिकायतें रखीं। सूद के मुताबिक सरकार इस विषय पर पहले से काम कर रही थी, लेकिन सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रस्तावित व्यवस्था में पीजी का पंजीकरण, स्थानीय निकाय से लाइसेंस, पुलिस सत्यापन और भवन की संरचनात्मक तथा अग्नि सुरक्षा से जुड़ी मंजूरी को अहम बनाया जा सकता है। पंजीकृत पीजी की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने की भी तैयारी है, ताकि विद्यार्थी किसी पीजी में जाने से पहले उसकी वैधता, क्षमता और सुरक्षा संबंधी जानकारी देख सकें।
सरकार नीति को अंतिम रूप देने से पहले पीजी संचालकों, अभिभावकों, छात्र संगठनों, संबंधित एजेंसियों तथा बिजली-पानी से जुड़े विभागों से सुझाव लेगी। इसके बाद प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल स्तर पर चर्चा कर कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
दूसरी ओर, हादसे के बाद एमसीडी ने सत्य निकेतन सहित विभिन्न इलाकों में जर्जर और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। खतरनाक इमारतों को खाली कराने, सील करने और जरूरत पड़ने पर गिराने की कार्रवाई की जा रही है। सरकार का जोर अब पीजी कारोबार को केवल किराये की व्यवस्था नहीं, बल्कि जवाबदेही और छात्र सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थित सेवा बनाने पर है।


