इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विश्वेश्वरैया पीएचडी योजना चरण-2 के तहत विश्वविद्यालय को लगातार दूसरे वर्ष पीएचडी सीट प्रदान की है। योजना के लिए विश्वविद्यालय को 42.05 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े रणनीतिक क्षेत्रों में उच्चस्तरीय शोध को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन, साइबर सिक्योरिटी और स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में शोध को आगे बढ़ाया जाएगा। जेके इंस्टीट्यूट के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीलेश आनंद योजना के नोडल अधिकारी हैं।
पिछले वर्ष योजना के तहत तीन शोधार्थियों ने प्रवेश लिया था। आदित्य रंजन एआई आधारित सड़क परिवहन सुरक्षा, वीरेंद्र कुमार सेमीकंडक्टर डिजिटल ट्विन, अल्ट्रा लो पावर सेंसर और एआई आधारित सेंसर डिजाइन तथा सूबेदार सिंह एआई और मशीन लर्निंग आधारित स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम पर शोध कर रहे हैं।
चयनित शोधार्थियों को पहले दो वर्षों तक एचआरए सहित 53,650 रुपये प्रतिमाह और अगले तीन वर्षों तक 60,900 रुपये प्रतिमाह फेलोशिप मिलेगी। शोध संबंधी खर्चों के लिए सालाना 1.20 लाख रुपये की सहायता भी दी जाएगी। शोधार्थियों को अधिकतम छह महीने तक विदेशी प्रयोगशालाओं में शोध का अवसर मिलेगा, जहां उन्हें 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह तक सहायता दी जा सकती है।
इधर शैक्षणिक सत्र 2026-27 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय 959 पीएचडी सीटों पर प्रवेश देगा। इनमें 470 सीटें विश्वविद्यालय परिसर और 489 संघटक महाविद्यालयों में हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितंबर 2026 है


