राजस्थान सरकार जेन-जी और जेन-अल्फा के छात्र प्रदर्शनों से निपटने के लिए अपना तरीका बदलने जा रही है। अब स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो पुलिस और प्रशासन का पहला कदम बल प्रयोग नहीं, बल्कि संवाद होगा। इसके लिए गृह विभाग एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रहा है।
प्रस्तावित एसओपी के तहत प्रदर्शन की सूचना मिलते ही अनुभवी अधिकारी मौके पर पहुंचेंगे और छात्रों से अफसर की तरह नहीं, बल्कि अभिभावक और दोस्त की तरह बातचीत करेंगे। उनकी समस्याओं और मांगों को समझकर आंदोलन की मूल वजह दूर करने की कोशिश की जाएगी। प्रदर्शनकारी छात्रों पर मुकदमे दर्ज न करने और अनावश्यक दबाव नहीं बनाने पर भी जोर रहेगा।
हाल के महीनों में अलवर के थानागाजी, जोधपुर के लूणी और भरतपुर सहित कई क्षेत्रों में स्कूली बच्चों ने शिक्षकों की कमी, जर्जर स्कूल भवन, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किए हैं। नई रणनीति में संबंधित विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर जहां संभव हो, तत्काल समाधान कराने की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल प्रदर्शन समाप्त कराना नहीं, बल्कि उसकी वजह खत्म करना है। हालांकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा। सोशल मीडिया के दौर में बच्चों और युवाओं के प्रदर्शन के वीडियो तेजी से वायरल होने के कारण सरकार संवेदनशील और संवाद आधारित व्यवस्था अपनाने पर जोर दे रही है।


