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राम मंदिर के पहले CEO बने एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंधन में बड़ा बदलाव करते हुए एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया गया है।

From Military Command to Ram Mandir Management: Jitendra Mishra Takes New Role


Published: 17:13pm, 02 Sep 2026

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंधन में बड़ा बदलाव करते हुए एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया गया है।  ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी। इस पद के लिए देशभर से आए 5,585 आवेदनों के बीच लंबी चयन प्रक्रिया के बाद मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगी।इसके अलावा श्रीराम ट्रस्ट की बैठक में नए पदाधिकारियों की घोषणा भी की गई जिनमें  मदन मोहन पांडेय , महेश भागचंदका और निर्मला यादव घोषित किए गए।

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे हैं, जिनके पास लड़ाकू विमान संचालन से लेकर रणनीतिक सैन्य योजना और शीर्ष स्तर के प्रशासन का लंबा अनुभव है। वे भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख भी रह चुके हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसी कमान का नेतृत्व कर रहे थे।

हजारों उम्मीदवारों में से हुआ चयन

राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO के चयन के लिए जुलाई में तीन सदस्यीय सर्च कमेटी गठित की थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व NIT रायपुर अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल थे।

CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 3,570 उम्मीदवारों ने विस्तृत मूल्यांकन फॉर्म पूरा किया। तय मानकों के आधार पर 108 उम्मीदवार अगले चरण तक पहुंचे। ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद 17 उम्मीदवारों को अयोध्या में आमने-सामने साक्षात्कार के लिए बुलाया गया और 16 उम्मीदवारों ने इसमें हिस्सा लिया। इसके बाद सर्च कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपा, जिसमें से जितेंद्र मिश्रा का चयन किया गया।

38 साल से अधिक का वायुसेना अनुभव

जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन मिला था। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी पुणे, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल बेंगलुरु, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के पूर्व छात्र हैं।

फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे मिश्रा के पास 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है। करीब चार दशक की सैन्य सेवा में उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन की कमान से लेकर एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट के चीफ टेस्ट पायलट, दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग और डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।

उन्हें उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।

सैन्य कमान से राम मंदिर प्रबंधन तक

एयर मार्शल मिश्रा की नियुक्ति को राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को पेशेवर और संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि CEO के अधिकार और जिम्मेदारियां ट्रस्ट तय करेगा। CEO की प्रमुख जिम्मेदारियों में वित्तीय प्रबंधन, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं की व्यवस्था और ट्रस्ट में भक्तों का विश्वास बनाए रखना शामिल होगा।

CEO ट्रस्ट के अधीन काम करेगा और मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासन तथा प्रबंधन को व्यवस्थित करने में अहम भूमिका निभाएगा। ट्रस्ट के मुताबिक उसकी कार्यप्रणाली में सरकार का हस्तक्षेप नहीं होगा और प्रशासनिक अधिकारों की सीमा भी ट्रस्ट ही निर्धारित करेगा।

ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा नाम

जितेंद्र मिश्रा का नाम हाल में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी चर्चा में रहा है। पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में वे देश के बेहद संवेदनशील पश्चिमी हवाई क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वायुसेना की महत्वपूर्ण कमान संभालने के बाद अब उन्हें देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली है। करीब चार दशक तक सैन्य अनुशासन, रणनीति और प्रशासन का अनुभव रखने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के सामने अब चुनौती राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच बेहतर सुविधाएं, पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने की होगी।

Jitendra