नीट पेपर लीक मामले में अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पालीग्राफ और ब्रेन-मैपिंग टेस्ट कराने की मांग करने वाले तीन आरोपितों को राउज एवेन्यू की विशेष अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने आरोपित मांगीलाल, दिनेश और विकास बिवाल की ओर से दाखिल अर्जियों को खारिज कर दिया।
तीनों आरोपितों ने अदालत के समक्ष आवेदन दाखिल कर स्वेच्छा से पालीग्राफ और ब्रेन-मैपिंग टेस्ट कराने की अनुमति मांगी थी। आरोपितों का कहना था कि वे जांच एजेंसी के सामने अपनी ईमानदारी और बेगुनाही साबित करना चाहते हैं। उनका यह भी तर्क था कि इन वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने में मदद मिल सकती है।
मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में हुई। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने आरोपितों की दलीलों और उनके आवेदनों पर विचार करने के बाद तीनों अर्जियों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही आरोपितों को अपनी इच्छा के आधार पर पालीग्राफ या ब्रेन-मैपिंग टेस्ट कराने की अनुमति नहीं मिली।
नीट पेपर लीक प्रकरण में सीबीआई की जांच जारी है और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं तथा आरोपितों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। अदालत का यह आदेश ऐसे समय आया है जब आरोपित वैज्ञानिक परीक्षणों के जरिए जांच में सहयोग करने और अपने पक्ष को मजबूत करने का दावा कर रहे थे।


