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हायर सेकेंडरी से पहले 73% छात्र छोड़ रहे स्कूल, संसदीय समिति ने जताई चिंता

संसदीय एस्टीमेट्स कमेटी (2026-27) ने देश में स्कूली शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ स्कूलों और छात्रों की संख्या में तेज गिरावट देखी जा रही है।

Estimates Committee Raises Alarm Over School Dropouts and Lack of CwSN Facilities


Published: 13:46pm, 13 Aug 2026

संसदीय एस्टीमेट्स कमेटी (2026-27) ने देश में स्कूली शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ स्कूलों और छात्रों की संख्या में तेज गिरावट देखी जा रही है। समिति की दसवीं रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 73 प्रतिशत छात्र हायर सेकेंडरी शिक्षा पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि देश में 9,11,032 प्राइमरी स्कूल और 4,12,805 अपर प्राइमरी स्कूल हैं, जबकि सेकेंडरी स्कूलों की संख्या केवल 1,61,808 और हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 90,866 है। इसी तरह छात्रों की संख्या भी प्राइमरी स्तर पर 6.18 करोड़ से घटकर हायर सेकेंडरी स्तर पर करीब 1.64 करोड़ रह जाती है। समिति ने सरकार से मौजूदा प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्तर तक अपग्रेड करने को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है, ताकि छात्रों की उच्च कक्षाओं तक पहुंच बढ़े और ड्रॉपआउट दर कम हो।

रिपोर्ट में विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CwSN) के लिए उपलब्ध सुविधाओं की कमी पर भी गंभीर चिंता जताई गई। समिति के अनुसार, देश के आधे से अधिक स्कूलों में CwSN-अनुकूल बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं है। स्पेशल एजुकेटर्स की भर्ती की प्रगति भी धीमी पाई गई। एलिमेंट्री सेक्शन में नए स्पेशल एजुकेटर्स के लिए 962 लाख रुपये के बजट में से केवल 80.50 लाख रुपये खर्च किए गए।

समिति ने दिव्यांग छात्रों के लिए “जीरो रिजेक्शन पॉलिसी” को प्रभावी ढंग से लागू करने, शिक्षकों को समावेशी शिक्षा का प्रशिक्षण देने, निर्धारित बजट का समय पर उपयोग करने और स्कूलों में सुलभ एवं सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करने पर जोर दिया है। साथ ही मंत्रालय से देशभर में स्पेशल एजुकेटर्स की वास्तविक जरूरत का आकलन कर उनकी भर्ती जल्द पूरी करने की सिफारिश की गई है।

Jitendra