उत्तर प्रदेश टीजीटी भर्ती परीक्षा के इंग्लिश विषय के प्रश्नपत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पाए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आयोग से यह भी पूछा है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है और परीक्षा किस तरह आयोजित की जाती है।
125 में 33 प्रश्न गलत पाए गए
मामला टीजीटी भर्ती परीक्षा के इंग्लिश विषय के प्रश्नपत्र से जुड़ा है। परीक्षा में पूछे गए कुल 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न गलत पाए गए हैं। शुरुआत में 29 प्रश्नों को सिलेबस से बाहर बताया गया था। इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों ने चार अन्य प्रश्नों पर भी आपत्ति दर्ज कराई। हाईकोर्ट के निर्देश पर विशेषज्ञों की जांच में वे चारों प्रश्न भी गलत पाए गए। इस तरह पूरे प्रश्नपत्र का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा त्रुटिपूर्ण निकला।
केवल अंक बांटना समाधान नहीं: हाईकोर्ट
आयोग ने अदालत को बताया कि गलत प्रश्नों के अंक अन्य सही प्रश्नों में समायोजित कर दिए गए हैं और संशोधित चयन सूची जारी की गई है। इस नई सूची में 42 अतिरिक्त अभ्यर्थियों का चयन किया गया है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए कहा कि जब प्रश्नपत्र का एक चौथाई से अधिक हिस्सा गलत हो, तो केवल अंक बांटना स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। अदालत ने प्रश्नपत्र निर्माण और परीक्षा प्रक्रिया की गहन समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता
टीजीटी इंग्लिश परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न सामने आने के बाद अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है, जहां आयोग को पूरी परीक्षा प्रक्रिया और प्रश्नपत्र तैयार करने की व्यवस्था का विस्तृत विवरण देना होगा। अदालत के सख्त रुख के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।


