केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को परीक्षण के तौर पर 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के एक-एक अरब पॉलिमर बैंक नोट जारी करने की अनुमति दे दी है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि सफल फील्ड ट्रायल के बाद आरबीआई इन दोनों मूल्यवर्गों में नियमित रूप से पॉलिमर नोट जारी कर सकेगा।
आरबीआई ने अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत सरकार को प्रस्ताव भेजा था। सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है। ये नए नोट मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ प्रचलन में रहेंगे। फिलहाल पारंपरिक कागजी नोटों को पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने की कोई योजना नहीं है।
आरबीआई पॉलिमर नोटों के अधिक टिकाऊ होने, उनकी लंबी शेल्फ लाइफ और बढ़ती नकदी मांग को पूरा करने की क्षमता का आकलन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार पॉलिमर नोट कागज के नोटों की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में करेंसी नोटों की सुरक्षित छपाई पर 4,875.2 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि पिछले वर्ष यह खर्च 6,372.8 करोड़ रुपये था।
सरकार ने कहा कि पॉलिमर नोटों का डिजिटल भुगतान पर असर नियमित जारी होने के बाद ही स्पष्टहोगा। भारत ने 2012 में भी ऐसा प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण योजना टल गई थी। दुनिया के लगभग 60 देश पॉलिमर नोट अपना चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले ऐसे नोट जारी किए थे। परीक्षण के नतीजे निर्णायक होंगे।


