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अब सेवा क्षेत्र की असली तस्वीर हर महीने होगी सामने!

केंद्र सरकार ने पहली बार सेवा उत्पादन सूचकांक (Services Producer Index-SPI) जारी किया है, जिससे देश के सेवा क्षेत्र की वास्तविक प्रगति का हर महीने आकलन किया जा सकेगा।

New Services Output Index to Strengthen Economic Planning and Policy Decisions


Published: 16:34pm, 15 Jul 2026

भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है, लेकिन अब तक इस क्षेत्र की वास्तविक उत्पादन क्षमता को मापने के लिए कोई अलग आधिकारिक सूचकांक नहीं था। सरकार ने पहली बार सेवा उत्पादन सूचकांक जारी कर इस कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह सूचकांक केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि नीति निर्माण और आर्थिक विश्लेषण का नया आधार बनने जा रहा है।

इस सूचकांक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब सरकार को हर महीने पता चलेगा कि सेवा क्षेत्र के किस हिस्से में वास्तविक वृद्धि हो रही है और किस क्षेत्र में गिरावट है। पहले सेवा क्षेत्र का आकलन मुख्य रूप से कीमतों के आधार पर होता था, जबकि नया सूचकांक वास्तविक उत्पादन को मापेगा। इससे महंगाई और वास्तविक विकास के बीच का अंतर भी स्पष्ट होगा।

इसका सीधा लाभ सरकार, उद्योग और निवेशकों तीनों को मिलेगा। यदि किसी क्षेत्र, जैसे होटल, परिवहन, आईटी, स्वास्थ्य या शिक्षा सेवाओं में तेजी या मंदी आती है तो सरकार समय रहते नीतिगत फैसले ले सकेगी। इससे रोजगार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और आर्थिक सुधारों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

अप्रैल 2026 के पहले आंकड़ों में 19 में से 14 सेवा क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज हुई है। हवाई परिवहन में 60.4 प्रतिशत, खुदरा व्यापार में 30.8 प्रतिशत, भंडारण एवं सहायक परिवहन सेवाओं में 28.7 प्रतिशत, रियल एस्टेट में 27.7 प्रतिशत और आवास एवं भोजन सेवाओं में 13.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं।

सरकार अब 29 सेवा क्षेत्रों का उत्पादन सूचकांक हर महीने जारी करेगी। इससे आरबीआई, नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और उद्योग जगत को समय पर विश्वसनीय आंकड़े मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) विनिर्माण क्षेत्र की दिशा बताता है, उसी तरह सेवा उत्पादन सूचकांक भारत के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का नियमित और वैज्ञानिक आकलन उपलब्ध कराएगा। यह कदम भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Jitendra