भारत उच्च शिक्षा के लिए विदेशी छात्रों के पसंदीदा गंतव्यों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। शिक्षा मंत्रालय की अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार, देश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कुल 58,134 विदेशी छात्र पढ़ रहे थे। ये विद्यार्थी दुनिया के 173 देशों से भारत आए। विदेशी छात्रों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी नेपाल की रही। भारत में पढ़ने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में 24.1 प्रतिशत छात्र नेपाल से थे, यानी लगभग हर चार विदेशी विद्यार्थियों में से एक नेपाली छात्र था।
नेपाल के बाद संयुक्त अरब अमीरात की हिस्सेदारी सात प्रतिशत रही। अमेरिका और बांग्लादेश से आए छात्रों की हिस्सेदारी समान रूप से 5.9 प्रतिशत दर्ज की गई। नाइजीरिया से 5.5 प्रतिशत और जिम्बाब्वे से चार प्रतिशत विद्यार्थी भारत में पढ़ रहे थे। शीर्ष 10 देशों से आने वाले विद्यार्थियों की कुल विदेशी छात्र संख्या में हिस्सेदारी 63.8 प्रतिशत रही। इसके अलावा लेबनान, बुर्किना फासो, मंगोलिया, मेक्सिको, कजाखस्तान, बेलारूस और चिली सहित कई देशों के विद्यार्थी भी भारतीय शिक्षण संस्थानों में नामांकित थे।
पिछले पांच वर्षों में भारत में विदेशी छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। शैक्षणिक वर्ष 2019-20 में देश में 48,898 विदेशी विद्यार्थी थे, जो 2023-24 में बढ़कर 58,134 हो गए। इस अवधि में विदेशी छात्रों की संख्या में 9,236 की वृद्धि, यानी लगभग 18.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
पुरुष विदेशी छात्रों की संख्या 2019-20 के 32,386 से बढ़कर 2023-24 में 37,295 हो गई। इसी दौरान महिला विदेशी विद्यार्थियों की संख्या 16,512 से बढ़कर 20,839 पहुंच गई। इससे पता चलता है कि भारत में उच्च शिक्षा के प्रति विदेशी छात्राओं का आकर्षण भी बढ़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों में स्नातक पाठ्यक्रम सबसे अधिक लोकप्रिय रहे। वर्ष 2023-24 में 73.6 प्रतिशत विदेशी छात्र स्नातक पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे थे। स्नातक स्तर पर कुल 42,779 विदेशी विद्यार्थी नामांकित थे। इनमें 27,849 पुरुष और 14,930 महिलाएं शामिल थीं। वहीं, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में 9,845 विदेशी छात्र पढ़ रहे थे, जो कुल विदेशी नामांकन का 16.8 प्रतिशत था। शेष विद्यार्थी पीएचडी, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और एकीकृत पाठ्यक्रमों में नामांकित थे।
राज्यों में कर्नाटक ने सबसे अधिक 7,914 विदेशी छात्रों को आकर्षित किया। पंजाब 7,902 छात्रों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। महाराष्ट्र में 6,190, उत्तर प्रदेश में 5,953 और तमिलनाडु में 5,694 विदेशी छात्र पढ़ रहे थे।
भारत सरकार वर्ष 2018 में शुरू किए गए स्टडी इन इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से देश को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। विदेशी छात्र संख्या में लगातार वृद्धि भारत की शैक्षणिक गुणवत्ता, किफायती शिक्षा और विविध पाठ्यक्रमों के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।


