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बंगाल के 12 जिलों में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की जांच, 18 सदस्यीय समिति गठित

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के 12 जिलों में संचालित अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की पहचान के लिए चल रहे सर्वेक्षण की समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग ने इसके लिए 18 सदस्यीय समिति गठित की है। समिति 15 जुलाई से संबंधित जिलों का दौरा शुरू करेगी और जमीनी स्तर पर मदरसों की स्थिति, पंजीकरण तथा संचालन से जुड़ी जानकारियों की जांच करेगी।

Published: 12:34pm, 14 Jul 2026

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के 12 जिलों में संचालित अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की पहचान के लिए चल रहे सर्वेक्षण की समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग ने इसके लिए 18 सदस्यीय समिति गठित की है। ऐसे संस्थानों को आमतौर पर ‘खारिजी मदरसा’ कहा जाता है।

समिति 15 जुलाई से संबंधित जिलों का दौरा शुरू करेगी और जमीनी स्तर पर मदरसों की स्थिति, पंजीकरण तथा संचालन से जुड़ी जानकारियों की जांच करेगी। समिति को 21 जुलाई तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय करेगी।

जांच के दायरे में कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, नदिया, हुगली, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना शामिल हैं। जिला अधिकारियों की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर इन जिलों को विस्तृत समीक्षा के लिए चुना गया है।

इससे पहले जिला अधिकारियों को मदरसों की स्थापना तिथि, पंजीकरण की स्थिति, छात्र-छात्राओं की संख्या, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का विवरण, आवासीय सुविधा तथा वहां पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम की जानकारी भेजने के निर्देश दिए गए थे।

राज्य सरकार का कहना है कि इस कवायद का उद्देश्य मदरसा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और गैर-कानूनी रूप से संचालित संस्थानों की पहचान करना है। जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

Jitendra