Learning a foreign language after Class 12 can open attractive career opportunities in India and abroad.
आज के वैश्विक दौर में विदेशी भाषा सीखना केवल अतिरिक्त योग्यता नहीं, बल्कि एक मजबूत करियर विकल्प बन चुका है। 12वीं के बाद छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी, स्पेनिश, रूसी, चीनी, अरबी या कोरियाई जैसी भाषाओं में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या स्नातक पाठ्यक्रम कर सकते हैं। इन भाषाओं में अच्छी पकड़ युवाओं को अनुवाद, पर्यटन, शिक्षा, मीडिया, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार के अवसर दिला सकती है।
12वीं पास छात्र अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार तीन से छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स, एक से दो वर्ष का डिप्लोमा या विदेशी भाषा में पूर्णकालिक बीए ऑनर्स कर सकते हैं। कई विश्वविद्यालयों में प्रवेश योग्यता और मेरिट के आधार पर होता है, जबकि कुछ संस्थानों में प्रवेश परीक्षा देनी पड़ती है। बीए पूरा करने के बाद छात्र एमए और पीएचडी तक की पढ़ाई भी कर सकते हैं।
देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान विदेशी भाषा के पाठ्यक्रम संचालित करते हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय विदेशी भाषाओं में स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए जाना जाता है, जहां सामान्यतः CUET के माध्यम से प्रवेश मिलता है। दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके कई कॉलेज फ्रेंच, जर्मन, जापानी और चीनी जैसी भाषाओं में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स कराते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, रूसी और चीनी भाषा के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इसके अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय और हैदराबाद विश्वविद्यालय भी इस क्षेत्र में विकल्प प्रदान करते हैं। जर्मन भाषा के लिए गोएथे इंस्टीट्यूट और जापानी के लिए जापान फाउंडेशन जैसे सांस्कृतिक संस्थान भी उपयोगी माने जाते हैं।
करियर के लिहाज से फ्रेंच, जर्मन और जापानी भाषाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। फ्रेंच भाषा पर्यटन, आतिथ्य, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अवसर देती है। जर्मन भाषा का ज्ञान ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और तकनीकी कंपनियों में उपयोगी हो सकता है। जापानी भाषा भारत-जापान व्यापार, तकनीकी सहयोग और कॉरपोरेट सेक्टर में रोजगार के नए रास्ते खोलती है। स्पेनिश, अरबी, मंदारिन और कोरियाई भाषा के जानकारों के लिए भी व्यापार, पर्यटन, चिकित्सा पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय ग्राहक सेवा में अवसर मौजूद हैं।
विदेशी भाषा सीखने के बाद छात्र अनुवादक, दुभाषिया, भाषा शिक्षक, टूरिस्ट गाइड, लैंग्वेज ऑफिसर, इंटरनेशनल सेल्स एग्जीक्यूटिव और कंटेंट विशेषज्ञ बन सकते हैं। दूतावास, प्रकाशन संस्थान, होटल, एयरलाइंस, ट्रैवल कंपनियां, आईटी कंपनियां और बहुराष्ट्रीय कंपनियां भाषा विशेषज्ञों की सेवाएं लेती हैं। फ्रीलांस अनुवाद और ऑनलाइन भाषा प्रशिक्षण भी कमाई के अच्छे विकल्प बन रहे हैं।
हालांकि केवल भाषा बोलना ही पर्याप्त नहीं है। सफल करियर के लिए व्याकरण, लेखन, उच्चारण, संबंधित देश की संस्कृति और मजबूत कम्युनिकेशन स्किल पर भी पकड़ जरूरी है। यदि छात्र नियमित अभ्यास और सही संस्थान का चयन करें, तो विदेशी भाषा उनके लिए देश और विदेश में आकर्षक करियर का मजबूत आधार बन सकती है।


