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AI की आंधी में बदल रही शिक्षा और नौकरियों की दुनिया

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने दुनिया भर में शिक्षा और रोजगार के स्वरूप को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चीन है, जहां 2021 से 2025 के बीच विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम बंद या अस्थायी रूप से बंद कर दिए, जबकि लगभग 10,200 नए कोर्स शुरू किए गए। भारत में भी बदलाव की आहट साफ सुनाई दे रही है।

Published: 16:39pm, 16 Jun 2026

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने दुनिया भर में शिक्षा और रोजगार के स्वरूप को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चीन है, जहां 2021 से 2025 के बीच विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम बंद या अस्थायी रूप से बंद कर दिए, जबकि लगभग 10,200 नए कोर्स शुरू किए गए। इनमें AI, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और उन्नत तकनीकों से जुड़े पाठ्यक्रम प्रमुख हैं। वहीं कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और प्रबंधन जैसे पारंपरिक विषयों में कटौती की गई है।

भारत में भी बदलाव की आहट साफ सुनाई दे रही है। कर्नाटक सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए सरकारी कॉलेजों में 458 बीए, बीएससी और बीकॉम कॉम्बिनेशन बंद कर दिए हैं तथा 1,300 से अधिक कोर्सों में सीटें घटा दी हैं। आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में AI का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि AI नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि काम करने का तरीका बदलेगा। भारत में 4,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) AI स्किल्स वाले युवाओं को आकर्षक पैकेज पर भर्ती कर रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार 2030 तक 22 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन AI का प्रभावी उपयोग करने वाले पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य उन्हीं का होगा जो तकनीकी ज्ञान के साथ निर्णय क्षमता, संचार कौशल और AI टूल्स के व्यावहारिक उपयोग में दक्ष होंगे।

YuvaSahakar Team