हाल ही में दिल्ली के एक फर्नीचर मार्केट में लगी भीषण आग ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आगजनी की घटनाएं कितनी खतरनाक हो सकती हैं। इस घटना में लगभग 250 से 300 के करीब दुकानें और टिन शेड जलकर राख हो गए, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के कारण देशभर में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह क्षेत्र केवल लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा ही नहीं करता, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर भी उपलब्ध करा रहा है।
फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग विज्ञान और तकनीक की वह शाखा है, जो भवनों, उद्योगों और कार्यस्थलों को आग से सुरक्षित रखने, जोखिम का आकलन करने और आपातकालीन सुरक्षा योजनाएं तैयार करने का कार्य करती है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ आग लगने की संभावनाओं को कम करने के लिए भवन निर्माण सामग्री, सुरक्षा उपकरणों और कार्यस्थल के वातावरण का विश्लेषण करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य मानव जीवन और संपत्ति की रक्षा करना होता है।
फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग में कई प्रकार के कोर्स उपलब्ध हैं। छात्र अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार इनमें प्रवेश ले सकते हैं। प्रमुख कोर्स इस प्रकार हैं—
• डिप्लोमा इन फायर फाइटिंग
• डिप्लोमा इन हेल्थ, सेफ्टी एंड एनवायरनमेंट
• पीजी डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग
• बीएससी इन फायर इंजीनियरिंग
• बीटेक इन फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग
• आईटीआई इन फायर टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट
इन कोर्सों की अवधि छह महीने से लेकर चार वर्ष तक हो सकती है। बीटेक जैसे डिग्री कोर्स के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषयों के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है। कई संस्थानों में प्रवेश जेईई मेन्स और अन्य प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर दिया जाता है।
फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में सफल होने के लिए साहस, धैर्य, नेतृत्व क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की योग्यता जरूरी होती है। आग जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
शारीरिक फिटनेस भी इस क्षेत्र की बड़ी आवश्यकता है। पुरुष उम्मीदवारों की न्यूनतम लंबाई 165 सेंटीमीटर और महिलाओं की 157 सेंटीमीटर होनी चाहिए। साथ ही अच्छी दृष्टि और शारीरिक क्षमता अनिवार्य मानी जाती है।
औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के बढ़ने के साथ फायर एंड सेफ्टी प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। आज लगभग हर बड़े उद्योग और संस्थान में सुरक्षा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
इस क्षेत्र में निम्न सेक्टरों में रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध हैं—
• ऑयल एवं गैस कंपनियां
• पेट्रोकेमिकल उद्योग
• एयरपोर्ट और रेलवे
• पोर्ट एवं शिपिंग उद्योग
• सरकारी फायर सर्विस विभाग
• होटल और मल्टीनेशनल कंपनियां
• कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां
इन संस्थानों में फायर ऑफिसर, सेफ्टी इंजीनियर, रिस्क मैनेजर, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्सपर्ट और सेफ्टी कंसल्टेंट जैसे पदों पर कार्य किया जा सकता है।
फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग में शुरुआती स्तर पर वेतन लगभग 20 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक हो सकता है। अनुभव बढ़ने के साथ यह आय लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। खाड़ी देशों और बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की भारी मांग रहती है, जहां आकर्षक वेतन पैकेज दिए जाते हैं।
बीटेक या प्रोफेशनल डिग्री धारकों को औसतन 4 से 15 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज मिल सकता है। अनुभव प्राप्त करने के बाद युवा सेफ्टी ट्रेनर और सलाहकार के रूप में भी अपना करियर बना सकते हैं।
आज फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं रह गई है। इसमें आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। छात्रों को फायर मॉडलिंग सॉफ्टवेयर, सिमुलेशन सेंटर और सुरक्षा प्रशिक्षण सुविधाओं में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे किसी भी आपदा की स्थिति में बेहतर ढंग से कार्य कर सकें।
फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग आज के समय में एक ऐसा क्षेत्र बन चुका है, जहां समाज सेवा और करियर दोनों का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है। यह पेशा न केवल लोगों की जान बचाने का अवसर देता है, बल्कि युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और सम्मानजनक भविष्य भी प्रदान करता है। तकनीकी ज्ञान, साहस और फिटनेस रखने वाले युवाओं के लिए यह क्षेत्र सुनहरे अवसरों का द्वार खोल रहा है।


