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केंद्रीय कैबिनेट ने महिला आरक्षण संशोशन विधेयक को मंजूरी, 2029 लोकसभा चुनाव से होगा लागू

कैबिनेट द्वारा मंजूर प्रस्ताव के अनुसार, यह आरक्षण 'वर्टिकल' आधार पर लागू होगा। इसका अर्थ है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से तय किया जाएगा।

Published: 12:33pm, 09 Apr 2026

महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े संशोधन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। सरकार की योजना है कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू की जाए।

सूत्रों के अनुसार, इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार संविधान संशोधन सहित आवश्यक विधायी कदम उठाने की तैयारी में है। इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में जरूरी संशोधन पारित कराए जाएंगे। इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों से भी समर्थन मांगा है, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए संसद में व्यापक बहुमत की आवश्यकता होती है।

लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संसद की कुल सीटों में बढ़ोतरी की जा सकती है। फिलहाल लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 816 तक किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

यदि यह विस्तार लागू होता है तो कुल सीटों का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। इस आधार पर करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए निर्धारित की जा सकती हैं। माना जा रहा है कि इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी मौजूदा स्तर की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को ऐतिहासिक रूप से मजबूत कर सकता है और नीति निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका को व्यापक बनाएगा।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक रणनीतिक निर्णय लेते हुए नई जनगणना और परिसीमन का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने का विकल्प तैयार किया है।

इससे महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को समय पर पूरा करना संभव हो सकेगा और 2029 के लोकसभा चुनाव में इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा।

इसके लिए परिसीमन कानून में भी आवश्यक संशोधन लाए जा सकते हैं, ताकि सीटों का पुनर्निर्धारण किया जा सके और नई आरक्षित सीटों का निर्धारण संभव हो सके।

संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी

सरकार ने बजट सत्र की अवधि बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बनाई है। इस सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को संसद के दोनों सदनों में पेश कर पारित कराने की कोशिश की जाएगी।

यदि संसद से यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू हो सकता है और उसी वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान प्रभावी होगा।

आरक्षण का ढांचा

प्रस्ताव के अनुसार यह आरक्षण ‘वर्टिकल’ आधार पर लागू किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए निर्धारित अनुपात में आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के विभिन्न वर्गों की महिलाओं को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व का समान अवसर मिल सके।

राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू होगा प्रावधान

महिला आरक्षण का यह प्रावधान केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में लागू किया जाएगा।

इसके साथ ही दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

सरकार इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक संविधान संशोधन विधेयक के साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग से साधारण विधेयक भी ला सकती है।

प्रधानमंत्री ने बताया ऐतिहासिक कदम

प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण कानून से जुड़े प्रस्तावित बदलावों को लेकर अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में इसे देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं से जुड़ा कदम बताया है।

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण से जुड़ी पहल केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की महिलाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा में लाने का प्रयास है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका और प्रभाव दोनों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

YuvaSahakar Desk