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RBI ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव, बरकार रहेगी 5.25% की दर

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) का अनुमान 6.9% लगाया है। तिमाही आधार पर विकास दर पहली तिमाही में 6.8%, दूसरी में 6.7%, तीसरी में 7% और चौथी तिमाही में 7.2% रहने की उम्मीद है।

Published: 13:54pm, 08 Apr 2026

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की नए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली बैठक में नीतिगत दरों को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का निर्णय लिया है। इस निर्णय की घोषणा आरबीआई के गवर्नर Sanjay Malhotra ने 8 अप्रैल को की। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में होम लोन, कार लोन या किसी भी अन्य लोन की ईएमआई (EMI) में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।

लगातार दूसरी बार रेपो रेट में बदलाव नहीं

RBI ने लगातार दूसरी बार नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले फरवरी की बैठक में भी रेपो रेट को यथावत रखा गया था।

आरबीआई ने पिछले साल यानी 2025 में ब्याज दरों में कुल 1.25% की बड़ी कटौती की थी। इस सिलसिले की शुरुआत फरवरी 2025 में हुई थी जब गवर्नर संजय मल्होत्रा के पदभार संभालने के बाद दरों को 6.50% से घटाकर 6.25% किया गया था। इसके बाद जून में 0.50% और दिसंबर 2025 में 0.25% की अंतिम कटौती की गई, जिससे दरें 5.25% के स्तर पर आ गईं। तब से अब तक केंद्रीय बैंक ने दरों को स्थिर रखा है।

महंगाई पर ‘ईरान-इजरायल’ युद्ध का साया

नीतिगत दरों के ऐलान के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महंगाई को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा कि ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष की वजह से वैश्विक सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए ‘आयातित महंगाई’ का खतरा पैदा कर सकती हैं, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने का जोखिम है। इसके अलावा, देश के भीतर बेमौसम बारिश और खराब मौसम के चलते अनाज, फल और सब्जियों की कीमतों में उछाल आने की आशंका है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ सकती है।

जीडीपी (GDP) और महंगाई का अनुमान

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) का अनुमान 6.9% लगाया है। तिमाही आधार पर विकास दर पहली तिमाही में 6.8%, दूसरी में 6.7%, तीसरी में 7% और चौथी तिमाही में 7.2% रहने की उम्मीद है। वहीं, महंगाई के मोर्चे पर आरबीआई का लक्ष्य इसे 2% से 6% के दायरे में रखने का है। वित्त वर्ष 2027 के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 4.6% रखा गया है।

क्यों नहीं घटाई गई दरें?

आरबीआई इस समय ‘रुको और देखो’ (Wait and Watch) की नीति पर काम कर रहा है। गवर्नर के अनुसार, भले ही फरवरी के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स आर्थिक मजबूती की ओर इशारा कर रहे हों, लेकिन वैश्विक बाजार की उथल-पुथल को देखते हुए जल्दबाजी में कोई फैसला लेना अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसीलिए गवर्नर ने SDF को 5% और MSF दर को 5.5% पर बरकरार रखने की घोषणा की है।

क्या है रेपो रेट ?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज प्रदान करता है।

जब आरबीआई रेपो रेट को कम करता है तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से सस्ता कर्ज मिलता है। इसके बाद बैंक अक्सर इस लाभ को अपने ग्राहकों तक पहुंचाते हुए होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों की ब्याज दरों में कमी करते हैं। इसके विपरीत जब केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए उधार लेना महंगा हो जाता है और बैंक भी अपने ग्राहकों के लिए कर्ज की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं।

मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल को देखते हुए आरबीआई ने जल्दबाजी में दरें घटाने या बढ़ाने के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक उद्देश्य विकास को गति देना और महंगाई को 2-6% के अनिवार्य दायरे में रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्थितियां सामान्य नहीं होतीं, तब तक पॉलिसी रेट में इसी प्रकार का ‘पॉज बटन’ दबा रह सकता है।

YuvaSahakar Desk