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शिक्षा पर संसदीय समिति की सख्त टिप्पणियाँ, 2030 तक खर्च 6% GDP करने की सिफारिश

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में 67.6% पद खाली हैं, जिससे इसके कार्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है

Published: 10:29am, 20 Mar 2026

शिक्षा पर संसदीय समिति ने बुधवार को केंद्र सरकार से शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को वर्ष 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 6% तक बढ़ाने के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की सिफारिश की है। यह लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) में निर्धारित किया गया था। वर्तमान में केंद्र और राज्यों का कुल शिक्षा व्यय GDP का केवल 4.06% है।

समिति ने उच्च शिक्षा नियामक संस्थाओं में भारी स्टाफ की कमी पर भी गंभीर चिंता जताई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में 67.6% पद खाली हैं, जिससे इसके कार्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इसी तरह अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) में 63.6% रिक्तियां दर्ज की गई हैं।

Institutions of Eminence पर सवाल

समिति ने Institutions of Eminence (IoE) योजना के तहत वैश्विक प्रदर्शन को कमजोर बताया, क्योंकि कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय QS रैंकिंग के शीर्ष 100 में नहीं है। इस पर समिति ने वार्षिक जवाबदेही रिपोर्ट, सख्त निगरानी, समयबद्ध वैश्विक लक्ष्य और फंडिंग को शोध, फैकल्टी गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीयकरण जैसे मापदंडों से जोड़ने की सिफारिश की।

राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय पर शून्य खर्च
राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय (NDU) के लिए 2024-25 में ₹100 करोड़ और 2025-26 में ₹25 करोड़ आवंटित होने के बावजूद अब तक कोई खर्च नहीं हुआ है। समिति ने इसके लिए स्पष्ट कार्ययोजना और समयबद्ध क्रियान्वयन की मांग की है। साथ ही सुझाव दिया कि यह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय क्रेडिट-आधारित ऑनलाइन डिग्री और माइक्रो-क्रेडेंशियल्स पर ध्यान केंद्रित करे।

बालिकाओं के लिए STEM छात्रावास योजना

केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रत्येक जिले में बालिकाओं के लिए STEM छात्रावास बनाने की घोषणा का समिति ने स्वागत किया, लेकिन इसके लिए विस्तृत योजना, फंडिंग मॉडल, समयसीमा और पात्रता मानदंड तय करने को कहा। विशेष रूप से कम महिला नामांकन दर (GER), आकांक्षी, नक्सल प्रभावित और आदिवासी जिलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश पर निगरानी जरूरी

समिति ने भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश का समर्थन किया, लेकिन सख्त नियमन, मुनाफे का भारत में पुनर्निवेश, संतुलित पाठ्यक्रम और गुणवत्ता, फीस व विविधता की नियमित समीक्षा की आवश्यकता बताई। वर्तमान में भारत में 19 विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसर हैं, जिनमें से 3 पूरी तरह संचालित हैं।

स्कूली शिक्षा पर भी चिंता

समिति ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के उल्लंघन पर 22,298 गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की ओर ध्यान दिलाया। साथ ही 11.7 लाख बच्चों के स्कूल से बाहर होने पर चिंता जताते हुए UDISE+ पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम ट्रैकिंग की व्यवस्था मजबूत करने को कहा।

मिडडे मील योजना के विस्तार की सिफारिश

समिति ने पीएम पोषण योजना (PM Poshan) के तहत कक्षा 8 के बाद भोजन बंद होने पर आपत्ति जताई। उसने इसे कक्षा 10 तक और अगले पाँच वर्षों में कक्षा 12 तक बढ़ाने की सिफारिश की। इसके पीछे किशोरों के पोषण, विशेषकर बालिकाओं में ड्रॉपआउट कम करने और सीखने के परिणाम बेहतर करने की जरूरत बताई गई।

YuvaSahakar Desk