केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में गणपति पालयम कॉटन एवं सिल्क हथकरघा बुनकर सहकारी उत्पादन एवं बिक्री संस्था का दौरा किया और पारंपरिक हथकरघा सहकारी संस्था के कार्यों की समीक्षा की।
दौरे के दौरान मंत्री ने रेशमी वस्त्रों के लाइव उत्पादन की प्रक्रिया का अवलोकन किया और बुनाई कार्य में लगे कारीगरों से संवाद किया। उन्होंने बुनकरों के कौशल, समर्पण और निरंतर परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि पीढ़ियों से इस विरासत को संजोकर रखने वाले हथकरघा कारीगर आत्मनिर्भर भारत के विजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
मुरलीधर मोहोल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारी क्षेत्र में व्यापक और दूरगामी सुधार हो रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार और कारीगरों की सतत आजीविका सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु की सहकारी संस्थाएं सहकारिता पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु विशेष रूप से तिरुप्पुर जिला में 32 हथकरघा सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जो 15 हजार से अधिक कारीगरों को आजीविका प्रदान कर रही हैं। इनमें से कई संस्थाएं 1970 के दशक से निरंतर कार्य कर रही हैं।
इस अवसर पर तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश महामंत्री ए.पी. मुरुगनाथम और जिला अध्यक्ष के.सी.एम.पी. श्रीनिवासन भी उपस्थित रहे।


