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NAFCUB ने शहरी सहकारी बैंकों के गवर्नेंस संशोधन निर्देशों पर RBI से आपत्ति जताई

इसी संदर्भ में लक्ष्मी दास ने RBI से आग्रह किया कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत शहरी सहकारी बैंकों से जुड़े सभी निर्णयों और निर्देशों को न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण होने तक स्थगित रखा जाए

Published: 15:07pm, 09 Feb 2026

राष्ट्रीय शहरी सहकारी बैंक एवं क्रेडिट सोसायटी महासंघ (NAFCUB) के अध्यक्ष लक्ष्मी दास ने शहरी सहकारी बैंकों से संबंधित ड्राफ्ट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स–गवर्नेंस) संशोधन निर्देश, 2026 पर आपत्ति जताते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा को पत्र लिखा है।

अपने पत्र में लक्ष्मी दास ने 8 जनवरी 2026 को जारी आरबीआई की प्रेस विज्ञप्ति का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों के गवर्नेंस से जुड़े प्रस्तावित संशोधनों पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की थीं। उन्होंने कहा कि NAFCUB ने ड्राफ्ट दिशानिर्देशों का विस्तृत अध्ययन किया है।

NAFCUB अध्यक्ष ने बताया कि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 (अधिनियम 39, 2020) वर्तमान में मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायिक समीक्षा के अधीन है। ऐसे में उन्होंने आशंका जताई कि जब तक यह मामला न्यायालय में लंबित है, तब तक बैंकिंग विनियमन अधिनियम से उत्पन्न होने वाले सभी बाद के संशोधन और सहकारी बैंकों से संबंधित आरबीआई के निर्देश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माने जा सकते।

इसी संदर्भ में लक्ष्मी दास ने आरबीआई से आग्रह किया कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत शहरी सहकारी बैंकों से जुड़े सभी निर्णयों और निर्देशों को न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण होने तक स्थगित रखा जाए।

उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने हाल ही में शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों के गवर्नेंस ढांचे में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत निर्धारित वैधानिक कार्यकाल मानदंडों के अनुपालन को सुदृढ़ करना है।

ड्राफ्ट निर्देशों में उन मामलों को संबोधित किया गया है, जहां निदेशक अधिकतम दस वर्ष के सतत कार्यकाल को पूरा करने के बाद अल्प अवधि के लिए इस्तीफा देकर पुनः चुनाव या सह-नामांकन के माध्यम से बोर्ड में लौट आते थे, जिससे कानून की मंशा को दरकिनार किया जाता था।

Diksha

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