मुंबई, 7 फरवरी, 2026
कप्तान सूर्य कुमार यादव की एक छोर से विकेटों के पतझड़ के बीच अविजित 84 रन की तूफानी पारी की बदौलत भारत ने अमेरिका को यहाँ शनिवार रात वानखेड़े स्टेडियम की दोहरे उछाल वाली पिच पर आईसीसी टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट में अपना अभियान 29 रन से जीत के साथ शुरू किया। भारत की इस जीत के बाद कप्तान सूर्य कुमार यादव ने मुस्कुराते हुए अपनी भावनाओं को साझा किया। उन्होंने कहा, ‘मैं ही बस आपको बता सकता हूं कि मैं कितने दबाव में था, लेकिन मुझे खुद पर पूरा भरोसा था। मैं जानता था कि यदि मैं आखिर तक टिक कर बल्लेबाजी करता हूं तो हालात बदल सकता हूं। वानखेड़े की यह पिच कुछ अलग मिजाज की थी। हम यह जानते थे कि क्योंकि बाहर सूरज बहुत नहीं चमका था। पिच क्यूरेटर ने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन सूरज की रोशनी इतनी पर्याप्त नहीं थी कि पिच पर पानी देकर इसे अच्छी तरह रोल किया जा सकता। बावजूद इसके, हमें कहीं और बेहतर बल्लेबाजी की जरूरत है। अमेरिका पर इस संघर्षपूर्ण जीत के बावजूद हमें बहुत कुछ सीखने को मिला है।’
अपनी रणनीति पर बात करते हुए कप्तान ने आगे कहा, ‘हम सूझबूझ से और बेहतर बल्लेबाजी कर सकते थे। एक-दो अच्छी भागीदारियां हमें आसानी से 160 रन या इससे पार तक पहुंचा सकती थीं। टीम की स्थिति पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अभिषेक शर्मा पूरी तरह स्वस्थ नहीं थे और जसप्रीत बुमराह को भी बुखार था, इसलिए वह नहीं खेले। अब वाशिंगटन सुंदर दिल्ली में टीम के साथ जुड़ जाएंगे। मैं जानता हूं कि किसी दिन ऐसा भी होगा जब आपकी बल्लेबाजी नहीं चलेगी। मैंने अपनी टीम की पारी को संभालने की पूरी कोशिश की। मेरा बराबर यह मानना है कि एक बल्लेबाज को आखिर तक बल्लेबाजी करने की जरूरत होती है। मेरा मानना है कि यह ऐसी पिच नहीं थी जिस पर 180-190 रन बनाए जा सकते थे, बल्कि यह पिच कुल मिलाकर 140 रन के करीब वाली ही थी। मैंने यहाँ वानखेड़े के मैदान पर बहुत क्रिकेट खेली है और मैं जानता हूं कि ऐसी पिच पर कैसी बल्लेबाजी करनी है। छह विकेट मात्र 77 रन पर गंवाने के बाद मैंने आखिर तक बल्लेबाजी की क्योंकि किसी एक को अंत तक टिकना ही था। मैंने अपने स्वभाव के अनुकूल और अच्छे शॉट खेलने की कोशिश की।’
वहीं, भारत के उपकप्तान अक्षर पटेल ने अपनी बल्लेबाजी शैली और पिच के व्यवहार पर बात की। अक्षर ने कहा, ‘मुंबई में वानखेड़े की पिच अमूमन सपाट होती है, लेकिन मैच शुरू होने के दो ओवर बाद ही इसके व्यवहार ने हमें हैरान कर दिया। हमारी बल्लेबाजी यहाँ जिस तरह लड़खड़ाई, वह एक तरह से अच्छा अनुभव रहा। अच्छा यह हुआ कि यह पहले ही मैच में हो गया, जिससे हमें आगे के मैचों के लिए बहुत कुछ सीखने को मिला। जब मैं बल्लेबाजी के लिए उतरा तो हमने यही सोचा कि इस पर 135-140 रन बना लेते हैं तो अच्छा रहेगा, लेकिन फिर हमने अमेरिका के तेज गेंदबाज सौरभ नेत्रवलकर के एक ओवर में 21 रन बनाए और सूर्या ने इसके बाद और रन जोड़ दिए। क्रिकेट में पिच के मिजाज को समझना सबसे अहम होता है। अमेरिका के खिलाफ शुरू में बल्लेबाजी के लड़खड़ाने से हम खुद को अगले मैचों के लिए बेहतर ढंग से तैयार कर सकेंगे। इशान किशन जब बल्लेबाजी कर रहे थे, तब उन्होंने बताया कि इस पिच पर दोहरा उछाल है और तब हमने महसूस किया कि यहाँ 170 रन का स्कोर अच्छा होगा। हम लगभग इसके करीब पहुंचे। हमें विकेट गिरने के बावजूद अपने ‘दे दनादन’ की बल्लेबाजी शैली को बदलने की जरूरत नहीं है, बस हमें खुद को हालात के मुताबिक ढालना होगा। कुछ ओवरों में संभल कर खेलने और हर गेंद को उड़ाने से बचने की जरूरत थी। जब मैं कप्तान सूर्य के साथ बल्लेबाजी कर रहा था और उपयोगी भागीदारी चल रही थी, तब चीफ कोच गौतम गंभीर मैदान पर आए थे। उनसे यही चर्चा हुई कि पारी को आखिरी ओवर तक ले जाना है और यह देखना है कि हममें से कौन किस गेंदबाज का सामना करेगा।’
मैच के एक और नायक मोहम्मद सिराज ने अपनी वापसी पर भावुक होते हुए कहा, ‘अल्लाह ने 24 घंटे के भीतर मेरी तकदीर ही बदल दी। मैं अपने परिवार के साथ वक्त बिता रहा था, तभी भारत के स्ट्रेंग्थ और कंडीशनिंग कोच ली रॉ ने मुझे मेसेज कर पूछा कि मैं क्या कर रहा हूं। इस पर मैंने उन्हें जवाब दिया कि आप मुझे अभी मेसेज नहीं करें, मैं दो चार-दिवसीय मैच खेलकर आराम कर रहा हूं और मुझे इसकी सख्त जरूरत है।’ तकदीर का खेल देखिए कि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को तेज बुखार था और हर्षित राणा घुटने की चोट के चलते बाहर हो गए। ऐसे में भारत के पास अर्शदीप सिंह के साथ सिराज ही विकल्प बचे थे और उन्हें एकादश में जगह मिल गई। सिराज ने आगे कहा, ‘मैं चूंकि रणजी ट्रॉफी मैच खेलकर यहाँ टी-20 विश्व कप में खेलने उतरा था, तो मैंने अपनी उसी लेंथ को यहाँ भी बरकरार रखा। बल्लेबाजी के दौरान मैंने देखा था कि नई गेंद आसानी से बल्ले पर नहीं आ रही थी, इसलिए विकेट-टू-विकेट गेंदबाजी करने की योजना कारगर रही। मैं खुश हूं कि अपनी योजना को अमली जामा पहनाकर मैं विकेट चटका पाया। आपको मानसिक रूप से टी-20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए हमेशा तैयार रहने की जरूरत होती है। भारत के लिए खेलते हुए मुझे अब दस बरस होने को हैं, मैं जानता हूं कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए किस तरह तैयार रहना है। मैंने सोने से पहले खुद से बस यही कहा कि मुझे अपनी कारगर रणनीति पर कायम रहना है।’


