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सरकार ने स्टार्टअप की परिभाषा में किया बदलाव, ‘डीप टेक स्टार्टअप’ की नई श्रेणी जोड़ी

स्टार्टअप के लिए पात्रता शर्तों में कहा गया है कि इकाई की स्थापना को अधिकतम 10 वर्ष हुए हों और किसी भी वित्तीय वर्ष में उसका टर्नओवर 200 करोड़ रुपये से अधिक न हो

Published: 16:44pm, 08 Feb 2026

केंद्र सरकार ने स्टार्टअप से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए “स्टार्टअप” की परिभाषा को संशोधित किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी नए नोटिफिकेशन में पहली बार “डीप टेक स्टार्टअप” की एक अलग श्रेणी को औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। यह अधिसूचना 19 फरवरी 2019 की पुरानी स्टार्टअप अधिसूचना का स्थान लेगी।

नए नियमों के तहत अब सहकारी समितियों को भी स्टार्टअप मान्यता के दायरे में लाया गया है। इसके अनुसार भारत में पंजीकृत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP), मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के सहकारी समिति कानून के तहत पंजीकृत इकाइयाँ स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकेंगी।

स्टार्टअप के लिए पात्रता शर्तों में कहा गया है कि इकाई की स्थापना को अधिकतम 10 वर्ष हुए हों और किसी भी वित्तीय वर्ष में उसका टर्नओवर 200 करोड़ रुपये से अधिक न हो। साथ ही इकाई नवाचार आधारित उत्पाद, प्रक्रिया या सेवाओं के विकास या सुधार में संलग्न हो, अथवा ऐसा स्केलेबल बिजनेस मॉडल अपनाती हो जिससे रोजगार सृजन या संपत्ति निर्माण की संभावना हो। किसी मौजूदा व्यवसाय के विभाजन या पुनर्गठन से बनी इकाइयों को स्टार्टअप का दर्जा नहीं मिलेगा।

नोटिफिकेशन में पेश की गई ‘डीप टेक स्टार्टअप’ श्रेणी के तहत पात्रता अवधि को बढ़ाकर 20 वर्ष कर दिया गया है और टर्नओवर की सीमा 300 करोड़ रुपये तय की गई है। डीप टेक स्टार्टअप वे इकाइयाँ होंगी जो वैज्ञानिक या इंजीनियरिंग प्रगति पर आधारित समाधान विकसित करती हैं, अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर अधिक निवेश करती हैं, बौद्धिक संपदा (IP) का सृजन या स्वामित्व रखती हैं तथा जिनकी विकास प्रक्रिया लंबी और तकनीकी रूप से अनिश्चित होती है।

स्टार्टअप मान्यता के लिए इच्छुक इकाइयों को DPIIT पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र और व्यावसायिक गतिविधियों का विवरण अनिवार्य होगा, जबकि डीप टेक स्टार्टअप के लिए अतिरिक्त दस्तावेज भी जमा करने होंगे।

नोटिफिकेशन में मान्यता अवधि के दौरान फंड के उपयोग से जुड़ी शर्तें, कुछ प्रकार के निवेशों पर प्रतिबंध तथा गलत जानकारी देकर मान्यता प्राप्त करने की स्थिति में उसे रद्द करने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, आयकर अधिनियम की धारा 80-IAC के तहत कर लाभ प्राप्त करने की प्रमाणन प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है, जो पात्र प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों और LLP पर लागू होगी।

संशोधित स्टार्टअप फ्रेमवर्क आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगा।

Diksha