केंद्रीय वित एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में Economic Survey 2025-26 पेश करते हुए कहा कि उपभोग और निवेश के दोहरे इंजन से प्रेरित भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के वित्त वर्ष 2026-27 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह लगातार चौथा वर्ष है जब भारत की इकोनॉमी सबसे तेजी से बढ़ेगी। इस दौरान वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के 6.8-7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
Economic Survey में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू मांग आर्थिक विकास को निरंतर बढ़ावा देती रही है। पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, जीडीपी में निजी अंतिम उपभोग व्यय बढ़कर 61.5 प्रतिशत तक पहुंचा जो वित्त वर्ष 2012 से अब तक का सर्वोच्च स्तर (वित्त वर्ष 2023 में भी 61.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी) है। उपभोग में यह शक्ति एक सहायक वृहद आर्थिक वातावरण को प्रदर्शित करती है जिसकी मुख्य विशेषताओं में मुद्रास्फीति की कम दर, स्थिर रोजगार स्थितियां और बढ़ती वास्तविक क्रय शक्ति शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मजबूत कृषि संबंधी प्रदर्शन से प्रेरित स्थिर ग्रामीण उपभोग और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों से समर्थित शहरी उपभोग में निरंतर सुधार दर्ज किया गया है।
उपभोग के साथ निवेश ने अनुमानित 30 प्रतिशत पर अनुमानित सकल निर्धारित पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) के हिस्से के साथ विकास को बढ़ावा दिया है। जीएफसीएफ के 7.6 प्रतिशत विस्तारित होने के साथ निवेश पहली छमाही में मजबूत हुए, जिसने पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज गति को पीछे छोड़ दिया।
कृषि क्षेत्र 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा
समीक्षा में कहा गया है कि कृषि और संबद्ध सेवाओं के वित्त वर्ष 2025-26 में 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पहली छमाही में कृषि संबंधी गतिविधियों को अनुकूल मानसून से सहायता मिली। कृषि संबंधी जीवीए 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी जो वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में दर्ज 2.7 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है लेकिन 4.5 प्रतिशत के दीर्घ अवधि औसत से कम है। पशुधन एवं मत्स्य पालन में लगभग 5-6 प्रतिशत की अपेक्षाकृत स्थिर दर से वृद्धि हुई। कृषि जीवीए में उनका हिस्सा बढ़ा है।
औद्योगिक क्षेत्र में आई मजबूती
आर्थिक समीक्षा में उल्लेख किया गया है कि औद्योगिक सेक्टर मजबूती के संकेत प्रदर्शित कर रहा है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि प्रदर्शित की जो पहले के जताए गए अनुमान 7 से अधिक है। इसके अतिरिक्त निर्माण उद्योग गतिशील रहा है, जिसे निरंतर सार्वजनिक पूंजी व्यय और संरचना परियोजनाओं में जारी गति से मदद मिली। विनिर्माण सेक्टर का हिस्सा वास्तविक (स्थिर) मूल्य के हिसाब से 17-18 प्रतिशत पर मजबूत बना हुआ है। विनिर्माण के आउटपुट का सकल मूल्य (जीवीओ) सेवा क्षेत्र की तुलना में 38 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2025-26 में औद्योगिक सेक्टर के गति प्राप्त करने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 5.9 प्रतिशत से अधिक 6.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। पीएमआई विनिर्माण, आईआईपी विनिर्माण और ई-वे बिल जनरेशन सहित समीक्षाधीन वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक मजबूत मांग के कारण विनिर्माण कार्यकलापों के सुदृढीकरण का संकेत देते हैं।
घटी महंगाई
Economic Survey के अनुसार मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय नरमी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में मांग आधारित वृद्धि से वास्तविक क्रय शक्ति में सुधार आया है और उपभोग को मदद मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-दिसम्बर) में खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज गिरावट मुद्रास्फीति में नरमी आई है और मुद्रास्फीति गिरकर 1.7 प्रतिशत पर आ गई। इसमें सब्जी और दलहन कीमतों में कमी की अहम भूमिका रही। इसे अनुकूल कृषि स्थितियों, आपूर्ति पक्ष उपायों और एक मजबूत आधार से भी मदद मिली।


