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विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारतीय सहकारी बैंकों की मजबूती की सराहना

FSA रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि सहकारी और क्षेत्रीय बैंक भारत के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं

Published: 16:16pm, 10 Nov 2025

विश्व बैंक ने हाल ही में इंडिया फाइनेंशियल सेक्टर असेसमेंट (FSA) रिपोर्ट जारी की है, जो इस वर्ष की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक द्वारा संयुक्त रूप से किए गए फाइनेंशियल सेक्टर असेसमेंट प्रोग्राम (FSAP) का हिस्सा है। IMF ने इसी वर्ष फरवरी में फाइनेंशियल सिस्टम स्टेबिलिटी असेसमेंट (FSSA) प्रकाशित किया था।

रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सराहना की गई है कि उसने 2017 के बाद से सहकारी बैंकों पर अपने नियामक नियंत्रण को काफी मजबूत किया है। आरबीआई ने सभी संस्थाओं, विशेष रूप से अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों (UCBs) के लिए एक समान नियमन और पर्यवेक्षण ढांचा लागू किया है और उल्लंघनों पर समान दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक एन्फोर्समेंट विभाग की स्थापना की है।

रिपोर्ट के अनुसार UCB क्षेत्र समग्र रूप से स्थिर है और तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी 31 प्रतिशत की मजबूत कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) बनाए हुए है। हालांकि रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि कुछ UCBs अभी भी पूंजी की कमी से जूझ रहे हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में लगभग 20–22 UCBs जो क्षेत्र की कुल परिसंपत्तियों का लगभग 10% प्रतिनिधित्व करते हैं न्यूनतम नियामक पूंजी आवश्यकता से नीचे जा सकते हैं। यह कमी मुख्य रूप से ऋण हानि प्रावधानों में वृद्धि के कारण बताई गई है।

आरबीआई द्वारा सहकारी बैंक नियमन को सुदृढ़ करने, पर्यवेक्षण की दक्षता बढ़ाने और छोटे बैंकों के लिए अनुकूल साइबर सुरक्षा ढांचे विकसित करने के प्रयासों की व्यापक सराहना की गई है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सहकारी बैंकों की बढ़ती डिजिटल उपस्थिति और भुगतान प्रणालियों में उनका एकीकरण साइबर लचीलापन बढ़ाने की आवश्यकता को दर्शाता है।

साइबर जोखिमों को कम करने के लिए आरबीआई ने फिशिंग सिमुलेशन, साइबर ड्रिल और आईटी रिस्क असेसमेंट जैसी पहलें की हैं। विश्व बैंक ने सुझाव दिया है कि साइबर लचीलापन को और मजबूत करने के लिए क्षेत्रव्यापी क्राइसिस सिमुलेशन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्किंग मीट्रिक्स तय किए जाएं।

FSA रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि सहकारी और क्षेत्रीय बैंक भारत के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। छोटे बैंक जैसे UCBs और रीजनल रूरल बैंक्स (RRBs) अपनी कुल ऋण राशि का लगभग 75% प्राथमिकता क्षेत्र को देते हैं, जिससे वित्तीय समावेशन और ग्रामीण ऋण वितरण को बढ़ावा मिला है। हालांकि, इन बैंकों को PSL मानदंडों का पालन करने में बढ़ती अनुपालन लागतों का सामना भी करना पड़ रहा है।

समग्र रूप से विश्व बैंक और IMF की यह रिपोर्ट भारत के मजबूत सहकारी बैंकिंग नेटवर्क और आरबीआई की प्रगतिशील नीतियों की सराहना करती है। साथ ही पूंजी सुदृढ़ीकरण, जोखिम प्रबंधन और डिजिटल सुरक्षा पर निरंतर ध्यान बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देती है।

Diksha