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दिल्ली में बनेगी महिला कोऑपरेटिव सोसायटी

दिल्ली सरकार सहकारिता क्षेत्र को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के लिए व्यापक सुधार, डिजिटलीकरण, महिला व युवा सहभागिता, सस्ती ऋण सुविधा और नए सेक्टरों में विस्तार की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। सहकारिता मंत्री रविंद्र इंद्रराज सिंह ने बताया कि 6,000 से अधिक सहकारी समितियों को एक मंच पर लाकर ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को साकार करने का प्रयास किया जा रहा है।

Published: 12:38pm, 25 Feb 2026

विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सहकारिता को अर्थव्यवस्था का आधार बनाने का प्रयास पूरे देश में चल रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में इफको, एनसीयूआई, नेफेड, एनसीसीएफ, एनसीडीसी जैसी राष्ट्रीय स्तर की कई सहकारी संस्थाओं का मुख्यालय है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर सहकारिता क्षेत्र की स्थिति संतोषजनक नहीं है। लंबे समय बाद दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदेश के सहकारिता मंत्री रविंद्र इंद्रराज सिंह स्थानीय स्तर पर सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के प्रयास में जुटे हैं। इसे लेकर दिल्ली सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं। इस संबंध में उनसे एसपी सिंह और अभिषेक राजा ने लंबी बातचीत की। पेश हैं उनके प्रमुख अंशः  

 

पूरे देश में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक पहल की जा रही है। दिल्ली सरकार ने इसके लिए क्या-क्या कदम उठाएं हैं या उठा रही है?

आज पूरा देश माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के विजन सहकार से समृद्धि उत्सव को मना रहा है जिसमें समाज के हर वर्ग का समावेशन हो रहा है। दिल्ली प्रदेश की बात करें तो यहां 6,000 से अधिक कोऑपरेटिव सोसायटी हैं जिसमें लगभग 25 लाख से अधिक लोग एक-दूसरे से जुड़े हैं। हमने दिल्ली में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए, चाहे वह हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसायटी हो, थ्रिफ्ट एवं क्रेडिट सोसायटी हो, सहकारी बैंक हो, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट, मल्टीपरपस कोऑपरेटिव सोसायटी और अन्य जितनी भी अन्य कॉपरेटिव सोसायटीज हैं, उन सबको एक समान मंच देने का काम किया है और कर रहे हैं। हम उनके रिडेवलपमेंट और रिफॉर्म के साथ अन्य प्रदेशों द्वारा लागू सफल सहकारिता मॉडल का भी अध्ययन कर उन्हें दिल्ली में लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे दिल्ली में आवासीय, वित्तीय समावेशन, रोजगार सृजन, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। पुरानी हाउसिंग सोसायटी को लेकर लगातार रिडेवलपमेंट नीतियों पर चर्चा हो रही है। साथ ही नए सेक्टर जैसे पर्यटन, इंश्योरेंस, हरित उर्जा, टैक्सी, परिवहन आदि पर हम लगातार काम कर रहे हैं। 

हमने अभी हाल ही में डीसीएचएफसी जो हमारा बहुत बड़ा कोऑपरेटिव हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन है, की नई ब्रांच का रोहिणी के सेक्टर 15 में उद्घाटन किया है। यह प्राइवेट बैंक को कड़ी टक्कर दे रहा है। यह बहुत कम ब्याज 7.4 प्रतिशत तक पर हाउसिंग लोन दे रहा है। दिल्ली में 15 सहकारी बैंक हैं जिनकी 145 शाखाएं हैं। हम जल्द ही कोऑपरेटिव डेवलपमेंट बोर्ड बनाएंगे जिसमें हर वर्ग का व्यक्ति जुड़ेगा और कोऑपरेटिव के हितों की रक्षा करेगा। 

दिल्ली में थ्रिफ्ट एवं क्रेडिट सोसायटी की व्यापक मौजूदगी हैइसके बावजूद कर्ज का प्रवाह बहुत कम है। इसकी क्या वजह है और इस चुनौती से निपटने के लिए आप क्या कर रहे हैं?

दिल्ली में इस समय 1,600 से ज्यादा थ्रिफ्ट एवं क्रेडिट सोसायटीज हैं। हमने इसमें तरह-तरह की थ्रिफ्ट एवं क्रेडिट सोसायटी के फेडरेशन को एक समान मंच देने का काम किया जिससे कर्जदाता और लेनदार के बीच एक सामंजस्य स्थापित हुआ है। कर्ज के प्रवाह को बढ़ाने के लिए हम प्रक्रियाओं को सरल, समयबद्ध और सहकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे। हम डि-सेंट्रलाइजेशन ऑफ पावर कर रहे हैं। कर्जदाता की परेशानियों को कम करने के लिए तीन रिकवरी ऑफिसर यानी सहायक कलेक्टर बना रहे हैं ताकि पारदर्शिता के साथ-साथ रिकवरी प्रक्रिया में सुधार हो सके। साथ ही कर्ज लेने वालों के लिए ब्याज पर ब्याज की व्यवस्था को संशोधित करके मूलधन पर ही ब्याज की व्यवस्था को लागू करेंगे। पैनल इंटरेस्ट को भी हम कम करने का प्रयास कर रहे हैं। हम कुछ ऐसे प्रावधानों में भी संशोधन करने वाले हैं जो अभी लोगों के हित में नहीं हैं। उन पर लगातार कोऑपरेटिव के जानकारों से विचार-विमर्श कर रहे हैं और एक संशोधन बोर्ड का भी गठन कर रहे हैं।

युवाओं और महिलाओं को सहकारिता से जोड़ने के लिए आपकी सरकार क्या कर रही है?

महिलाएं परिवार और समाज दोनों को सशक्त करने में सक्षम हैं। सहकारी समितियों के प्रबंधन में  महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। महिला सशक्तीकरण के लिए एक ऐसी नई कोऑपरेटिव सोसायटी बनाने का प्रयास किया जा रहा है जिसकी सदस्य सिर्फ महिलाएं होंगी और महिलाएं हीं उनका संचालन करेंगी। स्वयं सहायता ग्रुप की महिलाओं को लगातार कोऑपरेटिव से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। जो महिला घर पर रहकर ही काम कर सकती है और जो घर में ही विभिन्न प्रोडक्ट्स का निर्माण करती हैं जैसे- अगरबत्ती, दीया, पापड़, सेव, बड़ी, जवै, खूशबूदार सामान आदि, हम ऐसी महिलाओं को कोऑपरेटिव का मंच देकर उनके जीवन को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। जहां तक युवाओं की बात है तो उन्हें जागरूक करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में वर्कशॉप, सेमिनार का आयोजन कर उन्हें सहकारिता से जोड़ने का लगातार प्रयास हो रहा है।

दिल्ली में रेहड़ी-पटरी वालों की बहुत बड़ी संख्या है। उन्हें कोऑपरेटिव से जोड़कर सस्ता लोन उपलब्ध कराने की बात आपने कही थी। क्या वह योजना बन चुकी है? उसकी क्या स्थिति है?

उस पर लगातार काम चल रहा है। इसके लिए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने का काम किया जा रहा है। सहकारी बैंकों से उन्हें सस्ता कर्ज दिलाने के लिए हम ऐसा मॉडल तैयार करने पर काम कर रहे हैं जिसमें मोबाइल एटीएम वैन के जरिये उनके घर के पास ही उन्हें कर्ज उपलब्ध कराया जा सके। दिल्ली के बजट में इसके लिए प्रावधान किया जाएगा और ऐसे लोगों को ट्रेनिंग देकर उनके लिए नई कोऑपरेटिव बनाई जाएगी। इनके माध्यम से लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर उनके सामान की बिक्री का एक माध्यम बनाया जाएगा। इसके लिए कोऑपरेटिव स्टोर खोलने के अलावा एक पोर्टल विकसित किया जाएगा जहां वे अपने सामान को बेच सकेंगे। दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट में ऐसा ही एक स्टोर खोलने की तैयारी हो चुकी है।

YuvaSahakar Desk